हमारे पूरà¥à¤µà¤œ-सराक
1. हमारे पूरà¥à¤µà¤œ-सराक
2. सराक जाति की निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित विशेषतायें हैं :
3. सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ के कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¤¤à¤¾
4. राà¤à¤šà¥€, सिहà¤à¥‚म जिले में सराक जाति जीन à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤•à¥à¤¤ थे
हमारे पूरà¥à¤µà¤œ-सराक
जिस पà¥à¤°à¤•ार‘‘सरावगी शबà¥à¤¦ शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤• शबà¥à¤¦ का बिगड़ा रूप है, उसी पà¥à¤°à¤•ार सराक, सरावक आदि à¤à¥€ शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤• शबà¥à¤¦ का ही बिगड़ा रूप है। ‘शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•’ का अरà¥à¤¥ होता है, शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤µà¤¾à¤¨, विवेकवान à¤à¤µà¤‚ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¤¾à¤¨à¥¤ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ सचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¥‡à¤µ, शासà¥à¤¤à¥à¤°, गà¥à¤°à¥ की शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• धरà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करने वाले मनà¥à¤·à¥à¤¯ को शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤• (सराक) कहते हैं। ‘शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•’ (सराक) के तीन लकà¥à¤·à¤£ है
1. जल छान कर पीना।
2. रातà¥à¤°à¤¿ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं करना à¤à¤µà¤‚
3. पà¥à¤°à¤à¥ का दरà¥à¤¶à¤¨ करना या जिनेनà¥à¤¦à¥à¤° देव की उपासना करना।
सराक जाति की निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित विशेषतायें हैं:
1. शà¥à¤¦à¥à¤§ शाकाहारी हैं।
2. पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, लहसून आदि अधिकांश वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ नहीं खाते हैं।
3. अषà¥à¤Ÿ मूलगà¥à¤£à¥‹à¤‚ का पालन करते हैं।
4. शादी (विवाह) अपनी समाज में ही करते हैं।
5. विधवा-विवाह à¤à¤µà¤‚ विजातीय-विवाह का निषेध हैं नियम तोड़ने वालों को जाति से अलग कर दिया जाता है।
6. काटो, काटा, टà¥à¤•ड़े करो, आदि हिसावाचक शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ में नहीं करते हैं।
7. सरल सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µà¥€ हैं, तथा अतिथि-सतà¥à¤•ार बड़े ही उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ से करते हैं।
8. à¤à¥‹à¤œà¤¨ बिना सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ किये नहीं बनाते हैं, और न ही बिना सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ किये à¤à¥‹à¤œà¤¨ करते हैं।
9. अपनी जाति के अलावा अनà¥à¤¯ किसी को रसोई में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नहीं करने देते हैं, à¤à¤µà¤‚ अपने घर के सदसà¥à¤¯ à¤à¥€ अशà¥à¤¦à¥à¤§ कपड़े पहने à¤à¤µà¤‚ बिना सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ किये रसोई में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नहीं करते हैं।
10. अपनी जाति के अलावा किसी को अपने बरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं कराते हैं, à¤à¤µà¤‚ किसी को à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराने पर उन बरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का उपयोग à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ में नहीं करते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤¯: अनà¥à¤¯ जातियों को à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराने के लिय घर में अलग बरà¥à¤¤à¤¨ रखे होते हैं।
11. सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œ २२ अà¤à¤•à¥à¤·à¥à¤¯ के तà¥à¤¯à¤¾à¤—ी थे।
12. शौच के कपड़ों से कोई à¤à¥€ वसà¥à¤¤à¥ नहीं छूते हैं।
13. किसी दूसरों के हाथ से बनी दाल, à¤à¤¾à¤¤, रोटी आज à¤à¥€ नहीं खाते हैं।
14. इनके पूरà¥à¤µà¤œ होटलों में à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं करते थे, अगर कोई होटल में या बाहर कहीं अनà¥à¤¯ जाति के घर पर, दà¥à¤•ान या होटल में कर लेता था तो सराक पंचायत उसे दणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ करती थी। दणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ हà¥à¤¯à¥‡ बिना उसे समाज के किसी à¤à¥€ कारà¥à¤¯ में नहीं बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जाता था। पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ होने पर ही उसकी शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ होती थी।
15. सराक जाति के गोतà¥à¤° चौबीस तीरà¥à¤¥à¤‚करों के नाम पर हैं जैसे आदिदेव, शानà¥à¤¤à¤¿à¤¦à¥‡à¤µ, अननà¥à¤¤à¤¦à¥‡à¤µ, गौतम, धरà¥à¤®à¤¦à¥‡à¤µ, सांडिलà¥à¤¯ आदि।
16. टाईटिल-सराक, मांà¤à¥€, मणà¥à¤¡à¤², आचारà¥à¤¯, चौधरी अधिकारी आदि।
सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ के कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¤¤à¤¾
सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ के कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¤¤à¤¾ देवाधिदेव १००८ शà¥à¤°à¥€ पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ à¤à¤—वान à¤à¤µà¤‚ शà¥à¤°à¥€ महावीर à¤à¤—वान थे। à¤à¤—वान पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ की मूरà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‚लिया जिले के अनाईजामबाद गà¥à¤°à¤¾à¤® में अà¤à¥€ à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। जिसकी ऊà¤à¤šà¤¾à¤ˆ ५ फीट है जिसके आसपास सराक बंधॠअà¤à¥€ à¤à¥€ है। उसी राजà¥à¤¯ के बाà¤à¤•à¥à¤¡à¤¼à¤¾ जिला के बाहà¥à¤²à¤¾à¤¡à¤¾ गà¥à¤°à¤¾à¤® में १२०० वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤—वान पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ है, जो कि मनोजà¥à¤ž, मनोरम à¤à¤µà¤‚ सबको आरà¥à¤•िषत करने वाली है। कà¥à¤› सराक बंधà¥à¤“ं के घरों में अà¤à¥€ à¤à¥€ मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ हैं। à¤à¤µà¤‚ उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में अà¤à¥€ à¤à¥€ छोटी-बड़ी à¤à¤µà¤‚ मनोजà¥à¤ž रà¥à¤®à¥‚ितयाठकाफी मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो रही हैं।
इनके पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ ने धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ देश की रकà¥à¤·à¤¾ के लिये अपना सरà¥à¤µà¤¸à¥à¤µ सरà¥à¤®à¤¿à¤ªà¤¤ कर दिया। कà¤à¥€ à¤à¥€ दूसरों के सामने हाथ नहीं पसारे। जब अनà¥à¤¯ विधरà¥à¤®à¥€ सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ का आगमन हà¥à¤† तो वे सराक बंधà¥à¤“ं को सतà¥à¤ªà¤¥ से विचलित कराकर हिसातà¥à¤®à¤• कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ कराने के लिठमजबूर कर रहे थे, यहाठतक कि उनके जैनमंदिर, धारà¥à¤®à¤¿à¤• साहितà¥à¤¯ को à¤à¥€ नषà¥à¤Ÿ à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿ करने में कटिबदà¥à¤§ हो गये। राजा, महाराजा, सामनà¥à¤¤ आदि अपने शासन काल में सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ से मदà¥à¤¯, मांस, मधॠआदि सेवन के लिये, उनकी बेटियों से जबरदसà¥à¤¤à¥€ शादी करवाने के लिये अनेकों अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° करने को आतà¥à¤° हà¥à¤¯à¥‡, उसी समय सà¤à¥€ अपने धरà¥à¤® की रकà¥à¤·à¤¾ हेतॠअपने-अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को छोड़कर अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ रूप से जंगल में वास करने लगे।
इनके पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की संकट कालीन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का जीता-जागता उदाहरण हमारी आà¤à¤–ों के समà¥à¤®à¥à¤– पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में है वहाठहिनà¥à¤¦à¥à¤“ं की, जैनों की कà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ हà¥à¤ˆ ? उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तरह-तरह की यातनायें सहनी पड़ी। असà¥à¤¥à¤¿à¤° à¤à¤µà¤‚ चंचल अवसà¥à¤¥à¤¾ में वरà¥à¤·à¥‹ बिताया जिस कारण से जिनमंदिर, धारà¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¤‚थ आदि से विमà¥à¤– हो गये तथा बाद में गà¥à¤°à¥à¤“ं का समागम à¤à¥€ न मिल सका। सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की पंचायत शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ थी। उन सà¤à¥€ का किसी à¤à¥€ कोरà¥à¤Ÿ (नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯) में केस-मà¥à¤•दता नहीं था। वे अपने à¤à¤—ड़ों को पंचायत में ही सà¥à¤²à¤à¤¾ लेते थे। सराक बंधà¥à¤“ं के पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ का इतना गौरव था कि कोरà¥à¤Ÿ में इनकी गवाही पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• मानी जाती थी। उपरोकà¥à¤¤ बातों से सिदà¥à¤§ होता है, कि वे सतà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦à¥€ à¤à¤µà¤‚ सचà¥à¤šà¥‡ के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ थे।
इनके पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ का खान-पान शà¥à¤¦à¥à¤§ à¤à¤µà¤‚ सातà¥à¤µà¤¿à¤• था। à¤à¥‹à¤œà¤¨, à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ के अंदर ही करते थे। à¤à¤• अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ अधिकारी ने कहा था कि मà¥à¤à¥‡ इस बात पर हैरानी है कि ये सराक जाति के लोग मांसाहारी लोगों के à¤à¥à¤‚ड में रहकर कैसे शà¥à¤¦à¥à¤§ शाकाहारी है ? इनके पूरà¥à¤µà¤œ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ पूरà¥à¤µà¤• जिनेनà¥à¤¦à¥à¤° पà¥à¤°à¤à¥ की उपासना-पूजा आदि करते थे। उनके बताये हà¥à¤¯à¥‡ मारà¥à¤— पर चलते थे। इस पà¥à¤°à¤•ार वे शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤• के सà¤à¥€ नियमों का पालन करते थे, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥, शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤µà¤¾à¤¨, विवेकवान, à¤à¤µà¤‚ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¤¾à¤¨ थे। आजकल ये लोग धरà¥à¤® से विमà¥à¤– हो जाने के कारण पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ के पूरà¥à¤µ संसà¥à¤•ारों को धीरे-धीरे à¤à¥‚लते जा रहे हैं। अà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¯: सà¤à¥€ सराक बंधॠजानते हैं कि हमारे पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ ने विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ रूप से जैन मंदिरों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कराया था। धरà¥à¤®à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ हेतॠजब सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ परिवरà¥à¤¤à¤¨ करना पड़ता था तब विरà¥à¤¦à¥à¤§ मतावलंबी मंदिरों à¤à¤µà¤‚ रà¥à¤®à¥‚ितयों को नषà¥à¤Ÿ-à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿ कर देते थे। धीरे-धीरे नये सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर बसने के लिये वहाठके राजा या जमींदार का आशà¥à¤°à¤¯ लेना पड़ा। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ के कहे मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• धरà¥à¤® का पालन करना पड़ता था। परिणाम-सà¥à¤µà¤°à¥‚प सराक बंधॠधरà¥à¤® से विमà¥à¤– होते गये। फिर à¤à¥€ अà¤à¥€ तक सराक जाति के लोग शाकाहारी à¤à¤µà¤‚ अहिंसक हैं। मदà¥à¤¯, मांस आदि का सेवन नहीं करते हैं। तथा अà¤à¥€ à¤à¥€ पानी छान कर पीते हैं, à¤à¤µà¤‚ कà¥à¤› लोग रातà¥à¤°à¤¿-à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं करते हैं। अधिकांश वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ णमोकार मंतà¥à¤° जानते हैं।
राà¤à¤šà¥€, सिहà¤à¥‚म जिले में सराक जाति जीन à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤•à¥à¤¤ थे।
मूसराक, सिकरिया सराक à¤à¤µà¤‚ कड़ासी सराक। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में मूल सराक à¤à¤µà¤‚ सिकरिया सराक दो à¤à¤¾à¤—ों में ही विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ है। यहाठआज à¤à¥€ सà¤à¥€ सराक जाति के लोग à¤à¤—वान ऋषà¤à¤¦à¥‡à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ के बताये हà¥à¤¯à¥‡ मारà¥à¤— ‘कृषि करो और ऋषि जीवन बिताओ’ का पालन करते हैं। और अपनी आजीविका चला रहे हैं। सराक जाति के लोग बिहार-बंगाल à¤à¤µà¤‚ उड़ीसा के कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में निवास कर रहे हैं। जिसकी संखà¥à¤¯à¤¾ लगà¤à¤— ६-ॠलाख तक होगी। बिहार बंगाल à¤à¤µà¤‚ उड़ीसा पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤ में मेदनीपà¥à¤° जिला को छोड़कर लगà¤à¤— ५०० गाà¤à¤µ हैं। इसकी सही संखà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने की रूप रेखा बन रही है।
‘सराक बंधà¥à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ीय परम पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ गणेशवरà¥à¤£à¥€ जी, शà¥à¤°à¥€ जिनेनà¥à¤¦à¥à¤° वरà¥à¤£à¥€ जी, शà¥à¤°à¥€ मनोहरलाल वरà¥à¤£à¥€ जी, शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°. शीतल पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦à¤œà¥€, पंडित शà¥à¤°à¥€ बाबूलाल जी जमादार, शà¥à¤°à¥€ बैजनाथ जी सरावगी, साहू शà¥à¤°à¥€ शांतिपà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ जी, रायबहादà¥à¤° शà¥à¤°à¥€ हरकचनà¥à¤¦ जी पाणà¥à¤¡à¤¯à¤¾ राà¤à¤šà¥€, शà¥à¤°à¥€ विमल पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦, शिखरचनà¥à¤¦à¥à¤° जी खरखरी वाले आदि सà¤à¥€ ने काफी पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ किया। उस समय अनेकों जिनमंदिर तथा छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को पढ़ने के लिये कई जगह विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ खोले गये। बहà¥à¤¤ दिनों तक विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ चले। उसी समय किसी सराक समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ में वकà¥à¤¤à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निमà¥à¤¨ पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ कही गई थी-
‘‘यदि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ जैन समाज विशाल वटवृकà¥à¤· है, तो सराक उसकी जड़ है, जिस पर यह वृकà¥à¤· पलà¥à¤²à¤µà¤¿à¤¤ होकर विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ हà¥à¤† है। यदि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ जैन संघ जिनेशà¥à¤µà¤° की नूतन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ है, तो सराक उसकी पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ का अवशेष हैं यदि जैन रूप परà¥à¤µà¤¤ की खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ करेंगे तो सराक उस खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ की उपलबà¥à¤§à¤¿ होगी। इसके बाद सनॠ१९८३ में ईसरी (गिरडीह) में परम पूजà¥à¤¯ १०८ शà¥à¤°à¥€ आचारà¥à¤¯ विदà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤—र जी महाराज के सानिधà¥à¤¯ में सराक समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ हà¥à¤† था।
तदनंतर परम पूजà¥à¤¯ उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ १०८ शà¥à¤°à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¸à¤¾à¤—रजी महाराज जी का बिहार पà¥à¤°à¤¾à¤‚त में पà¥à¤°à¤µà¤¸ होने से हजारी बाग पंचकलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा में सनॠ१९९२ दि. २ मई को तथा रांची में à¤à¥€ सराक समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ हà¥à¤†à¥¤ उसके बाद जब महाराज शà¥à¤°à¥€ उदयगिरि-खंडगिरि से लौटते समय सराक बंधà¥à¤“ं के गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ में जिनमंदिर के दरà¥à¤¶à¤¨ करते हà¥à¤¯à¥‡ बà¥à¤£à¥à¤¡à¥ (रांची) गाà¤à¤µ पधारे तब वहाठपर महाराजशà¥à¤°à¥€ के सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ जनजन के हृदय पर पड़ा। साथ ही साथ सराक बंधॠà¤à¥€ महाराज शà¥à¤°à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आरà¥à¤•िषत हà¥à¤¯à¥‡à¥¤ सà¤à¥€ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को देखते हà¥à¤¯à¥‡ वहां à¤à¤• विशाल रूप से ‘सराक समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨’ का आयोजन ९.२.९३ से १à¥.२.९३ तक किया गया। जिसमें सराक बंधà¥à¤“ं की कई हजारों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ रही तथा रà¥à¤§à¤¾à¤¿à¤®à¤• शिकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ २५-३० गाà¤à¤µà¥‹à¤‚ के लोगों ने पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया। सà¤à¥€ सराक बंधà¥à¤“ं में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागृति आयी है।
सराक बंधà¥à¤“ं के विकास हेतॠपांगà¥à¤°à¤¾ (रांची) में कà¥à¤› गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ के सराक यà¥à¤µà¤•ों को पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ किया गया, जिनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नौढ़ी, तमाड़, हà¥à¤°à¥‚णà¥à¤¡à¥€à¤¹, तड़ाई, नावाडीह, देवलटाड़, अगसिया, चींपड़ी, चोकाहातà¥, मांà¤à¥€à¤¡à¥€à¤¡, पारमडीह, हराडीह, बेड़ाहीड, पाणà¥à¤¡à¤¾à¤¡à¥€à¤¹ रड़गाà¤à¤µ, रूगड़ी गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ में धारà¥à¤®à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤£ शिविर चल रहा है। सà¤à¥€ लोगों में अपूरà¥à¤µ जागृति आ रही है। अत: हम सब लोगों को इन सराक बंधà¥à¤“ं के विकास à¤à¤µà¤‚ उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ हेतॠविचार करना चाहिये। सराक बंधà¥à¤“ं को à¤à¥€ समाज की रीतिरिवाजों का पालन करते हà¥à¤¯à¥‡ अपने कà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µà¤¤à¤¾ शà¥à¤°à¥€ पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ à¤à¤—वान तथा à¤à¤—वान महावीर के पद चिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ पर चलकर अपने जीवन को महान बनाना चाहिये।
वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में बिहार, बंगाल à¤à¤µà¤‚ उड़ीसा के मूल सराकों की कà¥à¤² जनसंखà¥à¤¯à¤¾ अनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¤: ६-ॠलाख होगी। जो निमà¥à¤¨ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ में निवास करती हैं बिहार पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤ के राà¤à¤šà¥€ जिला में ४८ गाà¤à¤µ सिंहà¤à¥‚म जिला में ५ गाà¤à¤µ धनबाद जिला में १३ गाà¤à¤µ संथाल परगना (दà¥à¤®à¤•ा) जिला में ३० गाà¤à¤µ पं. बंगाल के वरà¥à¤§à¤®à¤¾à¤¨ जिला में २ॠगाà¤à¤µ मेदिनीपà¥à¤° जिला में ४५ गाà¤à¤µ बाà¤à¤•à¥à¤¡à¤¾ जिला में ३१ गाà¤à¤µ बोकारो जिला में १० गाà¤à¤µ वीर à¤à¥‚म जिला में ३ गाà¤à¤µ पà¥à¤°à¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ जिला में ८८ गाà¤à¤µ कटक जिला में ४९ गाà¤à¤µ नोमागढ़ जिला में २५ गाà¤à¤µ गंजाम जिला में २२ गाà¤à¤µ पà¥à¤°à¥€ जिला में २९ गाà¤à¤µ खà¥à¤°à¥à¤¦à¤¾ जिला में २६ गाà¤à¤µ गà¥à¤‚जाम जिला में ८४ गाà¤à¤µ इन सà¤à¥€ सराक बनà¥à¤§à¥à¤“ं को धरà¥à¤® की मà¥à¤–à¥à¤¯ धारा में जोड़ने से संसà¥à¤•ृति की महती सेवा होगी।
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सà¥à¤°à¥‹à¤¤ : शà¥à¤°à¥€ कैलाशचनà¥à¤¦à¥à¤° संजीवकà¥à¤®à¤¾à¤° जैन, ८०३, छतà¥à¤¤à¤°à¥€ कटरा, नई सड़क, दिलà¥à¤²à¥€-६
बà¥à¤°. अतà¥à¤², रीडर à¤à¤µà¤‚ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·-हिनà¥à¤¦à¥€ विà¤à¤¾à¤—, à¤à¤¸. आर. à¤à¤¸. कालेज, नागपà¥à¤°
नà¥à¤¯à¥‚ à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤‚शन à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, सदर, नागपà¥à¤°
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Mail to : Ahimsa Foundation
www.jainsamaj.org
R20082020
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