वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤µà¤‚ योगदान: सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की आधारशिला
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
आज के तीवà¥à¤° परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिवेश में जहाठनवाचार और तकनीकी दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ता दी जा रही है, वहीं यह तथà¥à¤¯ à¤à¥€ उतना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि किसी à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की नींव अनà¥à¤à¤µ पर टिकी होती है। वरिषà¥à¤ नागरिकों का अनà¥à¤à¤µ केवल वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का संचय नहीं, बलà¥à¤•ि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की गहन समà¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का समनà¥à¤µà¤¯ है। अतः उनका योगदान सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक और आवशà¥à¤¯à¤• है।
अनà¥à¤à¤µ का पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ केवल सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और आंकड़ों पर आधारित नहीं हो सकते; उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤•ता और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤°à¥‚प होना चाहिà¤à¥¤ वरिषà¥à¤ नागरिक, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को निकट से देखा है, निरà¥à¤£à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में यथारà¥à¤¥à¤µà¤¾à¤¦à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकते हैं। उनका अनà¥à¤à¤µ नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को अधिक संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और दूरदरà¥à¤¶à¥€ बनाता है, जिससे निरà¥à¤£à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ और सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दोनों बढ़ती हैं।
सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¤µà¤‚ मूलà¥à¤¯ संरकà¥à¤·à¤£ में à¤à¥‚मिका
वरिषà¥à¤ समाज के नैतिक आधार सà¥à¤¤à¤‚ठहोते हैं। वे परंपराओं, मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और सामाजिक अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के संवाहक के रूप में कारà¥à¤¯ करते हैं। परिवार और समाज में उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ पीढ़ियों के बीच समनà¥à¤µà¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करता है। विशेष रूप से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में, जब सामाजिक संरचनाà¤à¤ तेजी से बदल रही हैं, वरिषà¥à¤ ों की à¤à¥‚मिका सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने में और अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाती है।
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उदाहरण
पà¥à¤°à¤¥à¤®, कई गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ विवादों के समाधान में वरिषà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सिदà¥à¤§ होती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा सामाजिक सौहारà¥à¤¦ बना रहता है।
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯, जल संरकà¥à¤·à¤£ जैसे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पारंपरिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के पà¥à¤¨à¤ƒ उपयोग में वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ ने पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• आधार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है, जिससे दीरà¥à¤˜à¤•ालिक समाधान संà¤à¤µ हà¥à¤ हैं।
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• तंतà¥à¤° में सहà¤à¤¾à¤—िता की आवशà¥à¤¯à¤•ता
वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ उपयोग तà¤à¥€ संà¤à¤µ है जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• ढांचे में सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ रूप से शामिल किया जाà¤à¥¤ इसके लिठसलाहकार समितियों, सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• संवाद मंचों तथा नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं में उनकी à¤à¤¾à¤—ीदारी सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ की जानी चाहिà¤à¥¤ साथ ही, उनके अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥€à¤•रण कर à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की योजनाओं के लिठउपयोगी बनाया जा सकता है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤• अमूलà¥à¤¯ सामाजिक पूंजी है, जिसे अनदेखा करना किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के लिठदीरà¥à¤˜à¤•ालिक रूप से हानिकारक हो सकता है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ और संवेदनशील शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ वही है, जो नवाचार और अनà¥à¤à¤µ के बीच संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर सके।
अतः आवशà¥à¤¯à¤• है कि वरिषà¥à¤ नागरिकों के अनà¥à¤à¤µ और योगदान को केवल औपचारिक समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तक सीमित न रखकर, उसे पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग बनाया जाà¤à¥¤ यही दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण à¤à¤• सशकà¥à¤¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और समावेशी समाज के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की दिशा में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कदम सिदà¥à¤§ होगा।
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
Email : CAINDIA@HOTMAIL.COM
Phone : 9810046108
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤µà¤‚ योगदान: सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की आधारशिला
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
आज के तीवà¥à¤° परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिवेश में जहाठनवाचार और तकनीकी दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ता दी जा रही है, वहीं यह तथà¥à¤¯ à¤à¥€ उतना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि किसी à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की नींव अनà¥à¤à¤µ पर टिकी होती है। वरिषà¥à¤ नागरिकों का अनà¥à¤à¤µ केवल वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का संचय नहीं, बलà¥à¤•ि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की गहन समà¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का समनà¥à¤µà¤¯ है। अतः उनका योगदान सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक और आवशà¥à¤¯à¤• है।
अनà¥à¤à¤µ का पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ केवल सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और आंकड़ों पर आधारित नहीं हो सकते; उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤•ता और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤°à¥‚प होना चाहिà¤à¥¤ वरिषà¥à¤ नागरिक, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को निकट से देखा है, निरà¥à¤£à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में यथारà¥à¤¥à¤µà¤¾à¤¦à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकते हैं। उनका अनà¥à¤à¤µ नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को अधिक संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और दूरदरà¥à¤¶à¥€ बनाता है, जिससे निरà¥à¤£à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ और सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दोनों बढ़ती हैं।
सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¤µà¤‚ मूलà¥à¤¯ संरकà¥à¤·à¤£ में à¤à¥‚मिका
वरिषà¥à¤ समाज के नैतिक आधार सà¥à¤¤à¤‚ठहोते हैं। वे परंपराओं, मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और सामाजिक अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के संवाहक के रूप में कारà¥à¤¯ करते हैं। परिवार और समाज में उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ पीढ़ियों के बीच समनà¥à¤µà¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करता है। विशेष रूप से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में, जब सामाजिक संरचनाà¤à¤ तेजी से बदल रही हैं, वरिषà¥à¤ ों की à¤à¥‚मिका सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने में और अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाती है।
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उदाहरण
पà¥à¤°à¤¥à¤®, कई गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ विवादों के समाधान में वरिषà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सिदà¥à¤§ होती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा सामाजिक सौहारà¥à¤¦ बना रहता है।
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯, जल संरकà¥à¤·à¤£ जैसे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पारंपरिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के पà¥à¤¨à¤ƒ उपयोग में वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ ने पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• आधार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है, जिससे दीरà¥à¤˜à¤•ालिक समाधान संà¤à¤µ हà¥à¤ हैं।
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• तंतà¥à¤° में सहà¤à¤¾à¤—िता की आवशà¥à¤¯à¤•ता
वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ उपयोग तà¤à¥€ संà¤à¤µ है जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• ढांचे में सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ रूप से शामिल किया जाà¤à¥¤ इसके लिठसलाहकार समितियों, सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• संवाद मंचों तथा नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं में उनकी à¤à¤¾à¤—ीदारी सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ की जानी चाहिà¤à¥¤ साथ ही, उनके अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥€à¤•रण कर à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की योजनाओं के लिठउपयोगी बनाया जा सकता है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤• अमूलà¥à¤¯ सामाजिक पूंजी है, जिसे अनदेखा करना किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के लिठदीरà¥à¤˜à¤•ालिक रूप से हानिकारक हो सकता है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ और संवेदनशील शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ वही है, जो नवाचार और अनà¥à¤à¤µ के बीच संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर सके।
अतः आवशà¥à¤¯à¤• है कि वरिषà¥à¤ नागरिकों के अनà¥à¤à¤µ और योगदान को केवल औपचारिक समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तक सीमित न रखकर, उसे पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग बनाया जाà¤à¥¤ यही दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण à¤à¤• सशकà¥à¤¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और समावेशी समाज के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की दिशा में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कदम सिदà¥à¤§ होगा।
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
Email : CAINDIA@HOTMAIL.COM
Phone : 9810046108
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤µà¤‚ योगदान: सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की आधारशिला
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
आज के तीवà¥à¤° परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिवेश में जहाठनवाचार और तकनीकी दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ता दी जा रही है, वहीं यह तथà¥à¤¯ à¤à¥€ उतना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि किसी à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की नींव अनà¥à¤à¤µ पर टिकी होती है। वरिषà¥à¤ नागरिकों का अनà¥à¤à¤µ केवल वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का संचय नहीं, बलà¥à¤•ि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की गहन समà¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का समनà¥à¤µà¤¯ है। अतः उनका योगदान सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक और आवशà¥à¤¯à¤• है।
अनà¥à¤à¤µ का पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ केवल सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और आंकड़ों पर आधारित नहीं हो सकते; उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤•ता और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤°à¥‚प होना चाहिà¤à¥¤ वरिषà¥à¤ नागरिक, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को निकट से देखा है, निरà¥à¤£à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में यथारà¥à¤¥à¤µà¤¾à¤¦à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकते हैं। उनका अनà¥à¤à¤µ नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को अधिक संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और दूरदरà¥à¤¶à¥€ बनाता है, जिससे निरà¥à¤£à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ और सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दोनों बढ़ती हैं।
सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¤µà¤‚ मूलà¥à¤¯ संरकà¥à¤·à¤£ में à¤à¥‚मिका
वरिषà¥à¤ समाज के नैतिक आधार सà¥à¤¤à¤‚ठहोते हैं। वे परंपराओं, मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और सामाजिक अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के संवाहक के रूप में कारà¥à¤¯ करते हैं। परिवार और समाज में उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ पीढ़ियों के बीच समनà¥à¤µà¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करता है। विशेष रूप से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में, जब सामाजिक संरचनाà¤à¤ तेजी से बदल रही हैं, वरिषà¥à¤ ों की à¤à¥‚मिका सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने में और अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाती है।
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उदाहरण
पà¥à¤°à¤¥à¤®, कई गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ विवादों के समाधान में वरिषà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सिदà¥à¤§ होती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा सामाजिक सौहारà¥à¤¦ बना रहता है।
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯, जल संरकà¥à¤·à¤£ जैसे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पारंपरिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के पà¥à¤¨à¤ƒ उपयोग में वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ ने पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• आधार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है, जिससे दीरà¥à¤˜à¤•ालिक समाधान संà¤à¤µ हà¥à¤ हैं।
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• तंतà¥à¤° में सहà¤à¤¾à¤—िता की आवशà¥à¤¯à¤•ता
वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ उपयोग तà¤à¥€ संà¤à¤µ है जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• ढांचे में सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ रूप से शामिल किया जाà¤à¥¤ इसके लिठसलाहकार समितियों, सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• संवाद मंचों तथा नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं में उनकी à¤à¤¾à¤—ीदारी सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ की जानी चाहिà¤à¥¤ साथ ही, उनके अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥€à¤•रण कर à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की योजनाओं के लिठउपयोगी बनाया जा सकता है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤• अमूलà¥à¤¯ सामाजिक पूंजी है, जिसे अनदेखा करना किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के लिठदीरà¥à¤˜à¤•ालिक रूप से हानिकारक हो सकता है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ और संवेदनशील शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ वही है, जो नवाचार और अनà¥à¤à¤µ के बीच संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर सके।
अतः आवशà¥à¤¯à¤• है कि वरिषà¥à¤ नागरिकों के अनà¥à¤à¤µ और योगदान को केवल औपचारिक समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तक सीमित न रखकर, उसे पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग बनाया जाà¤à¥¤ यही दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण à¤à¤• सशकà¥à¤¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और समावेशी समाज के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की दिशा में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कदम सिदà¥à¤§ होगा।
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
Email : CAINDIA@HOTMAIL.COM
Phone : 9810046108
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤µà¤‚ योगदान: सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की आधारशिला
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
आज के तीवà¥à¤° परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिवेश में जहाठनवाचार और तकनीकी दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ता दी जा रही है, वहीं यह तथà¥à¤¯ à¤à¥€ उतना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि किसी à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की नींव अनà¥à¤à¤µ पर टिकी होती है। वरिषà¥à¤ नागरिकों का अनà¥à¤à¤µ केवल वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का संचय नहीं, बलà¥à¤•ि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की गहन समà¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का समनà¥à¤µà¤¯ है। अतः उनका योगदान सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक और आवशà¥à¤¯à¤• है।
अनà¥à¤à¤µ का पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ केवल सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों और आंकड़ों पर आधारित नहीं हो सकते; उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤•ता और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤°à¥‚प होना चाहिà¤à¥¤ वरिषà¥à¤ नागरिक, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सामाजिक और पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को निकट से देखा है, निरà¥à¤£à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में यथारà¥à¤¥à¤µà¤¾à¤¦à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकते हैं। उनका अनà¥à¤à¤µ नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को अधिक संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और दूरदरà¥à¤¶à¥€ बनाता है, जिससे निरà¥à¤£à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ और सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दोनों बढ़ती हैं।
सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¤µà¤‚ मूलà¥à¤¯ संरकà¥à¤·à¤£ में à¤à¥‚मिका
वरिषà¥à¤ समाज के नैतिक आधार सà¥à¤¤à¤‚ठहोते हैं। वे परंपराओं, मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और सामाजिक अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के संवाहक के रूप में कारà¥à¤¯ करते हैं। परिवार और समाज में उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ पीढ़ियों के बीच समनà¥à¤µà¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करता है। विशेष रूप से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में, जब सामाजिक संरचनाà¤à¤ तेजी से बदल रही हैं, वरिषà¥à¤ ों की à¤à¥‚मिका सामाजिक संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने में और अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाती है।
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उदाहरण
पà¥à¤°à¤¥à¤®, कई गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ विवादों के समाधान में वरिषà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सिदà¥à¤§ होती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा सामाजिक सौहारà¥à¤¦ बना रहता है।
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯, जल संरकà¥à¤·à¤£ जैसे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पारंपरिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के पà¥à¤¨à¤ƒ उपयोग में वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ ने पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• आधार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है, जिससे दीरà¥à¤˜à¤•ालिक समाधान संà¤à¤µ हà¥à¤ हैं।
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• तंतà¥à¤° में सहà¤à¤¾à¤—िता की आवशà¥à¤¯à¤•ता
वरिषà¥à¤ ों के अनà¥à¤à¤µ का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ उपयोग तà¤à¥€ संà¤à¤µ है जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• ढांचे में सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ रूप से शामिल किया जाà¤à¥¤ इसके लिठसलाहकार समितियों, सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• संवाद मंचों तथा नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं में उनकी à¤à¤¾à¤—ीदारी सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ की जानी चाहिà¤à¥¤ साथ ही, उनके अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥€à¤•रण कर à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की योजनाओं के लिठउपयोगी बनाया जा सकता है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
वरिषà¥à¤ ों का अनà¥à¤à¤µ à¤à¤• अमूलà¥à¤¯ सामाजिक पूंजी है, जिसे अनदेखा करना किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के लिठदीरà¥à¤˜à¤•ालिक रूप से हानिकारक हो सकता है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ और संवेदनशील शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ वही है, जो नवाचार और अनà¥à¤à¤µ के बीच संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर सके।
अतः आवशà¥à¤¯à¤• है कि वरिषà¥à¤ नागरिकों के अनà¥à¤à¤µ और योगदान को केवल औपचारिक समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तक सीमित न रखकर, उसे पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग बनाया जाà¤à¥¤ यही दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण à¤à¤• सशकà¥à¤¤, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और समावेशी समाज के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की दिशा में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कदम सिदà¥à¤§ होगा।
लेखक: वीरअनिल जैन, जोधपà¥à¤°
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