शà¥à¤°à¥€ गणेशी लाल जी महाराज साहब - संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ जीवन वृत
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जनà¥à¤® : सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ शालिनी माता धूलीबाई à¤à¤µà¤‚ पिता शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ पूनमचंदजी लालवानी बिलाड़ा, मारवाड़ निवासी के घर आंगन में वि. सं.1936 कारà¥à¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤•à¥à¤²à¤¾ छठ, बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° की शà¥à¤ रातà¥à¤°à¤¿ के चतà¥à¤°à¥à¤¥ पà¥à¤°à¤¹à¤° में माता धूली की पावन कà¥à¤•à¥à¤·à¥€ से à¤à¤• तेजसà¥à¤µà¥€ पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¾ का जनà¥à¤® हà¥à¤†à¥¤ नवजात शिशॠका गणेश नाम रखा गया। लालवानी परिवार à¤à¤µà¤‚ संपूरà¥à¤£ गांव मैं मंगल गीतों के साथ गà¥à¤¡à¤¼ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बटवाई गई। नवजात शिशॠगणेश का अतà¥à¤¯à¤‚त लाड पà¥à¤¯à¤¾à¤° शिषà¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° यà¥à¤•à¥à¤¤ पालन होने लगा। समय के साथ गणेश à¤à¥€ बड़े होने लगे, 5 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ पाठशाला जाने लगा उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ दिनों गणेशमल की माता ने दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤° को जनà¥à¤® दिया मां - बाप की शोà¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा में अà¤à¤¿à¤µà¥ƒà¤¦à¥à¤§à¤¿ हà¥à¤ˆ नव शिशॠका नाम शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° रखा गया। कांचन मणि सा सà¥à¤‚दर मेल गणेश तथा शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° से हà¥à¤†à¥¤ जहां मंगलसूचक गणेश तथा पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा सà¥à¤µà¤°à¥‚प शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° यà¥à¤—ल à¤à¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾ की रमणीय जोड़ी का संगम हà¥à¤†à¥¤ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ गणेशमल à¤à¥€ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ के à¤à¤‚डार थे। वे पढ़ते कम गà¥à¤£à¤¤à¥‡ अधिक, रटते कम रमाते अधिक। पढ़ने की अनूठी अà¤à¤¿à¤°à¥à¤šà¤¿ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विनयी, विवेकवान बना दिया। विनय, विवेकशीलता से कà¥à¤› ही वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में गणेश विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ - कोष वृदà¥à¤§à¤¿ पाने लगा। गणित, सामाजिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ तथा महाजनी लिखा पढ़ी में आशातीत सफलता पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करके अपने पिता शà¥à¤°à¥€ पूनमचंदजी और माता धूलीदेवी को संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ किया। बालक गणेश मल की उतà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤—ति देखकर माता - पिता ने सोच लिया - “पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¾ पà¥à¤¤à¥à¤° घर की पूरी - पूरी जवाबदारी संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ में थोड़े ही दिनों में सकà¥à¤·à¤® हो जाà¤à¤—ा। यह समरà¥à¤¥ होगा तो हमें धरà¥à¤® आराधना करने में आनंद आà¤à¤—ा।
काल की गत - मात - पिता - à¤à¤¾à¤ˆ - वियोग : काल की गति बड़ी विचितà¥à¤° होती है इसके गहन गरà¥à¤ में कà¥à¤¯à¤¾ - कà¥à¤¯à¤¾ छà¥à¤ªà¤¾ हà¥à¤† है? यह कोई कैसे जान पाà¤? गणेशमल ने 16वे वरà¥à¤· में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ किया ही था कि अचानक मां धà¥à¤²à¥€ का पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ शरीर काल में समा गया। मां धà¥à¤²à¥€ अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£ पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ यà¥à¤—ल पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को छोड़कर महायातà¥à¤°à¤¾ की ओर चल पड़ी। मां का वियोग संतान के लिठकितना दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• होता है, यह à¤à¥à¤•à¥à¤¤à¤à¥‹à¤—ी ही जान पाà¤à¤—ा। कई दिनों तक मां की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ उनके दिमाग में तैरती रहे पà¥à¤¯à¤¾à¤° à¤à¤°à¤¾ पालन-पोषण रह–रहकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ याद आता कà¤à¥€-कà¤à¥€ सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ में वे दोनों देखते मां धूली पà¥à¤¯à¤¾à¤° से मसà¥à¤¤à¤• पर हाथ फेरते हà¥à¤ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ दे रही है इस पà¥à¤°à¤•ार का आà¤à¤¾à¤¸ होता। अपने पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की दशा को देखकर पूनमचंद जी को कई बार विचार आता बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ रूप से लालन-पालन जैसा उनकी मां कर सकती थी वैसा कर पाना उनके लिठकठिन। पतà¥à¤¨à¥€ के सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वास के 23 दिन पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ 24 वे दिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिल का दौरा पड़ा और दोनों बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को छोड़कर इस संसार से विदा हो गà¤à¥¤ माता - पिता 24 दिन के à¤à¥€à¤¤à¤° चले गठअब दोनों बचà¥à¤šà¥‡ अकेले ही रहा है इस वजà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¤ ने दोनों à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ के दिल को तो चोट पहà¥à¤‚चाई ही साथ ही जिसने à¤à¥€ है सà¥à¤¨à¤¾ देखा उनके दिल दहल उठे दोनों à¤à¤¾à¤ˆ आखिर बालक ही तो ठहरे।आघात लगने से गणेश तथा शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° ने निशà¥à¤šà¤¯ कर लिया कि अब यहां नहीं रहना अनà¥à¤¯ गांव में जाना ही उचित रहेगा यहां रहेंगे तो पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤² माता-पिता की सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¿à¤² याद हमेशा आती रहेगी यह ठीक नहीं। इस पà¥à¤°à¤•ार दोनों à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ ने देश छोड़ दिया इसलिठकहा à¤à¥€ है -
धà¥à¤¨ के पकà¥à¤•े करà¥à¤®à¤ मानो, जिस पथ पर बढ़ जाते हैं।
à¤à¤• बार तो रौरव को à¤à¥€, सà¥à¤µà¤°à¥à¤— बिना दिखलाते हैं।।
दोनों à¤à¤¾à¤ˆ मातृà¤à¥‚मि को छोड़कर महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° के मनमाड नगर में चले आà¤à¥¤ दोनों à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ ने सोचा था कि यहां पर पढ़ाई à¤à¥€ कर लेंगे और साथ ही कà¥à¤› नौकरी करके जीवन बिताà¤à¤‚गे पर यह विचार – धारा निषà¥à¤ à¥à¤° काल को मंजूर कहां हà¥à¤ˆ? मौत आती हà¥à¤ˆ दिखाई नहीं देती आयà¥à¤·à¥à¤¯ करà¥à¤® खतà¥à¤® होने पर मौत आकर धर दबोचती है। मौत ने अपना निशाना छोटे à¤à¤¾à¤ˆ शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° पर डाला, बीमारी ने उसे घेर लिया गणेशमल ने अथक उपचार कराया किंतॠकोई असर नहीं हà¥à¤† à¤à¤¾à¤ˆ गणेशमल के देखते-देखते शोà¤à¤¾à¤šà¤‚दà¥à¤° सà¥à¤µà¤°à¥à¤— की राह पर चल पड़े। निराधार धरा पर गणेशमल के सामने माता-पिता à¤à¤µà¤‚ लघॠà¤à¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾ का वियोग à¤à¤• के बाद à¤à¤• आघात पर आघात दे गया।
पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ : साहसिक पथिक विचलित तथा निराशावादी नहीं बनता और विशेष परिशà¥à¤°à¤® के साथ संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से लोहा लेता है वही आगे जाकर जगत तथा जन - जन में वंदनीय, आदरणीय बन जाता है। यà¥à¤µà¤• गणेशमल के पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ ने करवट ली, à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ के जोर के कारण ही जो परिचित थे वह तो समà¥à¤®à¤¾à¤¨ दे ही रहे थे किंतॠअपरिचित जन à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गोद लेने को तैयार हो गà¤à¥¤ तब गणेशमल ने कहा मà¥à¤à¥‡ दो बाप नहीं करने। मैं परिशà¥à¤°à¤® के बलबूते पर जो à¤à¥€ कमाऊंगा वह मà¥à¤à¥‡ पसंद होगा। ईमानदारी पूरà¥à¤µà¤• अपना जीवन - यापन करना चाहता हूं कà¥à¤› दिनों में गणेशमल का मन मनमाड से उचट गया मनमाड छोड़कर आप बेलापà¥à¤° चले आà¤à¥¤ वहां à¤à¤• शà¥à¤°à¥€à¤®à¤‚त के यहां नौकरी करने लगे, लगà¤à¤— ढाई वरà¥à¤· तक नौकरी करते रहे। à¤à¤• दिन जाली हà¥à¤‚डी लिखने के लिठसेठने गणेशमल जी से कहा। तब निडरता से उतà¥à¤¤à¤° देते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जवाब दिया मेरे हाथ सतà¥à¤¯ हकीकत लिख सकते है असतà¥à¤¯ लिखना मेरे जीवन के लिठकलंक होगा à¤à¤¸à¥‡ काले कारनामे मà¥à¤à¤¸à¥‡ नहीं होंगे। सेठका मानस बदला हà¥à¤† था, यदि जाली हà¥à¤‚डी नहीं बनाà¤à¤‚गे तो वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° कैसे करें?वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° साधारण चले मà¥à¤à¥‡ मंजूर है किंतॠपैसों के लिठनकली हà¥à¤‚डी बनाना सरासर अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ है, विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤˜à¤¾à¤¤ है। जो अपने ऊपर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करके आà¤à¤—ा उसके साथ धोखा होगा।उनकी नजरों में ईमान - सतà¥à¤¯ - शील-अहिंसा का महतà¥à¤µ हैं। चांदी के टà¥à¤•ड़ों के पीछे उलà¤à¤¨à¤¾ नहीं, अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® पथ पर चलना है। गणेशमल ने बिना वेतन ही सेठसे सपà¥à¤°à¥‡à¤® विदाई चाह कहा - मà¥à¤à¥‡ आपके पैसों की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं है न मà¥à¤à¥‡ चाहिà¤, आपने इतने दिन घर दà¥à¤•ान पर रख लिया यह बहà¥à¤¤ बड़ी बात है।
सतà¥à¤¯à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ ा : आपकी सतà¥à¤¯à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ ा से बेलापà¥à¤° में ही रहने वाला à¤à¤• मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® à¤à¤¾à¤ˆ बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤†, उसने आपको वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° में सहयोग दिया सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ तथा मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® बंधॠके सहयोग से अचà¥à¤›à¥‡ ढंग से वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° चलने लगा कà¥à¤› दिनों में सारे नगर में आपके वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° कारà¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा होने लगी।
सगाई पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ को वैरागà¥à¤¯ ने हराया : शà¥à¤°à¥€ गणेशमल के नैतिक जीवन की सौरठआसपास के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में अचà¥à¤›à¥€ तरह फैली। सà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¥€ महक से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होकर ‘नगर शूल’ गांव के मानà¥à¤¯à¤µà¤° शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ी शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ खेमचंदजी बाफना ने अपनी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का विवाह आपके साथ करने का निशà¥à¤šà¤¯ किया। विवाह का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ लेकर à¤à¥€ आपके पास आठअपनी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के साथ विवाह करने का आपसे अनà¥à¤°à¥‹à¤§ किया तब आपने à¤à¤•ांत में बैठकर विचार किया कि विवाह के बंधन में बंधना अचà¥à¤›à¤¾ या तà¥à¤¯à¤¾à¤—ी बनाना? पूरà¥à¤µ जनà¥à¤® के शà¥à¤ संसà¥à¤•ारों से शà¥à¤ विचारों की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ खड़ी होती है बस वैसे ही उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सोचा और चिंतन मनन के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ इस निरà¥à¤£à¤¯ पर पहà¥à¤‚चे कि मà¥à¤à¥‡ संयम अंगीकार करना है, मैं à¤à¥‹à¤— विलास के दलदल में उलà¤à¤¨à¤¾ नहीं चाहता अतः आप अपनी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का विवाह के लिठकोई अनà¥à¤¯ वर की तलाश कीजिà¤à¥¤
धरà¥à¤® पथिक गà¥à¤°à¥ पà¥à¤°à¤µà¤° की सानिधà¥à¤¯à¤¤à¤¾ : कà¥à¤› दिन वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ हà¥à¤ होंगे à¤à¤• दिन अचानक शà¥à¤°à¥€ गणेशमल के पेट में à¤à¤¯à¤‚कर दरà¥à¤¦ पैदा हà¥à¤†à¥¤ अतिशय दरà¥à¤¦ से सोचने लगे यदि इसी दरà¥à¤¦ के बीच मेरी आयॠपूरà¥à¤£ हो गई तो संयम लेने की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अपूरà¥à¤£ रह जाà¤à¤—ी। संयम पथ पर चलता हà¥à¤† तà¥à¤¯à¤¾à¤— - पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤–ान सहित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤°à¥à¤— होगा तो सदगति, मिलेगी कहीं जीवन अधूरा ही न रह जाà¤? “यदि चार पà¥à¤°à¤¹à¤° के à¤à¥€à¤¤à¤° पेट - दरà¥à¤¦ का शमन हो गया तो अतिशीघà¥à¤° दीकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¥€à¤•ार करूंगा।“ इस पà¥à¤°à¤•ार अनाथी मà¥à¤¨à¤¿ के समान मन ही मन निशà¥à¤šà¤¯ कर लिया। नवकार महामंतà¥à¤° के धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी तनà¥à¤®à¤¯ हो गà¤à¥¤ दृढ़ निशà¥à¤šà¤¯ तथा महामंतà¥à¤° के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से चार पà¥à¤°à¤¹à¤° पूरà¥à¤£ होते-होते तो शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी का पेट दरà¥à¤¦ ठीक हो गया। उतà¥à¤¤à¤® à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पà¥à¤°à¤¬à¤² वेग ने रोग को à¤à¤—ाकर ही दम लिया और आप पà¥à¤¨à¤ƒ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो गà¤à¥¤
विकà¥à¤°à¤® संवत 1963 में बेलापà¥à¤° में कोटा संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ के महामà¥à¤¨à¤¿ वातà¥à¤¸à¤²à¥à¤¯ वारिधि तपसà¥à¤µà¥€ राज शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¤¾à¤œà¤œà¥€ महाराज का चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ है। तब आप वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° को तिलांजलि देकर निकल पड़े महान गà¥à¤°à¥ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने। बलवती à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के साथ शà¥à¤°à¥€ गणेशमल जी बेलापà¥à¤°, तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ के सनà¥à¤¨à¤¿à¤•ट जा पहà¥à¤‚चे। धरà¥à¤® पथ पà¥à¤°à¤¬à¥‹à¤§à¤• मà¥à¤¨à¤¿ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¤¾à¤œà¤œà¥€ महाराज को देखकर, उनके दरà¥à¤¶à¤¨ करके शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी ने à¤à¤¸à¤¾ अनà¥à¤à¤µ किया कि “यहां मà¥à¤à¥‡ आतà¥à¤® - दरà¥à¤¶à¤¨, आतà¥à¤® - कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ का अनà¥à¤ªà¤® पथ अवशà¥à¤¯ मिलेगा। “चरणों में विनमà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते हà¥à¤ अपना परिचय दिया तथा वे बोले - गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ! मैंने à¤à¥‹à¤—ों की नशà¥à¤µà¤°à¤¤à¤¾, संसार की असारता तथा देह कि कà¥à¤·à¤£à¤à¤‚गà¥à¤°à¤¤à¤¾ का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤: अनà¥à¤à¤µ किया है। संसारियों की सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ - परायणता à¤à¥€ मà¥à¤à¤¸à¥‡ छिप न सकी।जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ में अपना समà¤à¤¤à¤¾ था वह मेरे माता - पिता - à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ अकेला छोड़कर महापà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤£ कर गà¤à¥¤ मैंने जगत में दृषà¥à¤Ÿà¤¿ पसार कर देखा तो सहारा रूप में सिरà¥à¤« दो ही नजर आà¤, जिसमें पà¥à¤°à¤¥à¤® आप शà¥à¤°à¥€ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ गà¥à¤°à¥ और दूसरा धरà¥à¤®à¥¤ मैं आपके शà¥à¤°à¥€à¤šà¤°à¤£à¥‹à¤‚ में दीकà¥à¤·à¤¾ लेने को आया हूं। पंच महावà¥à¤°à¤¤ देने का अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ करें, इसके लिठमैंने पà¥à¤°à¤£ à¤à¥€ किया है। आप शà¥à¤°à¥€ के मारà¥à¤— दरà¥à¤¶à¤¨ में मेरा धारा हà¥à¤† कारà¥à¤¯ सिदà¥à¤§ हो जाठयही मेरा अनà¥à¤¨à¤¯ आगà¥à¤°à¤¹ है।
“देवानà¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¯! तà¥à¤®à¤¨à¥‡ जो शà¥à¤ संकलà¥à¤ª संजोया है, वह बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ à¤à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¾ ही à¤à¤¸à¤¾ महान विचार करने में सकà¥à¤·à¤® है। साधॠबनना बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ है पर इसमें मेहनत जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है।बड़े-बड़े वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ इस पद पर कदम बढ़ाने में हिचकिचाते हैं तो साधारण मानव की बात ही कà¥à¤¯à¤¾? à¤à¤—वान महावीर का आतà¥à¤® मारà¥à¤— जितना सरल, उतना ही कठिन है। मेरॠपरà¥à¤µà¤¤ के शिखर पर पहà¥à¤‚चना सरल हो सकता है, लोहे के चने चबाये जा सकते हैं, किंतॠशà¥à¤°à¤®à¤£-धरà¥à¤® की चढ़ाई उससे à¤à¥€ कठिन है, महा कठिन है। पंच महावà¥à¤°à¤¤, पांच समिति, तीन गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का समà¥à¤¯à¤•ता आराधना बड़ी दà¥à¤·à¥à¤•र पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। केश लोचन को कायर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ तो देख à¤à¥€ नहीं सकता। धीर – वीर पà¥à¤°à¥à¤· इन कठिनाइयों को सहजतया पार कर जाते हैं। संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से लोहा लेने की जिसमें कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है वहीं इस मारà¥à¤— पर बढ़ पाता है, वह कठिनाइयों के बीच से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ हà¥à¤† à¤à¥€ संयम-पथ को सरल मानता है। इसीलिठयह सरल किंवा कठिन दोनों तरफ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है”। तपसà¥à¤µà¥€ राज ने फरमाया।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ बड़े बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— कहते आठहैं कि सà¥à¤µà¤°à¥à¤£ जब तक आग को नहीं सहता तब तक शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ के शिखर पर नहीं पहà¥à¤‚चता। बस, वैसे ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जब तक दà¥à¤·à¥à¤•र राह से न गà¥à¤œà¤°à¥‡ वह कैसे पावन, निरà¥à¤®à¤² बन पाà¤? à¤à¥‚तकाल में अपने करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के कारण नरà¥à¤• गति में गई। नरà¥à¤• के महादà¥:खों, पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤˜à¤¾à¤¤à¤• वà¥à¤¯à¤¥à¤¾ को सहकर आई है तो उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° वेदना के सामने ये परीषह तो कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं है। जिन परीषहों को कायर दà¥:खरूप मानते हैं, उन संयमी जीवन में आने वाले संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ को मैं सà¥à¤–रूप मानता हूं। परीषह सहन करेंगे तà¤à¥€ तो निरà¥à¤œà¤°à¤¾ होगी। साधà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¾à¤° के पालन में कठोर कदम उठाà¤à¤‚गे तà¤à¥€ संयम की साधना में सफलता मिलेगी। साधॠजीवन जीने के लिठजो विचार आप शà¥à¤°à¥€ ने à¤à¥€ फरमाये है मैं उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ विचारों का समरà¥à¤¥à¤• ही नहीं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आचरण में लाने के लिठही आया हूं, आप मà¥à¤à¥‡ अपनी सेवा में रहने की आजà¥à¤žà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करें। मैं आपशà¥à¤°à¥€ की आजà¥à¤žà¤¾ की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•à¥à¤·à¤¾ में हूं, सेवा में रहने के बाद आप जैसा फरमाà¤à¤‚गे वैसा ही मैं करूंगा।
अंतरà¥à¤®à¤¨ की उजà¥à¤œà¤µà¤² वैरागà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जिसकी होती है उसे अपने विचारानà¥à¤¸à¤¾à¤° खोजने पर सचà¥à¤šà¥‡ गà¥à¤°à¥ मिल ही जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ ही धरà¥à¤® रूचि से ओत-पà¥à¤°à¥‹à¤¤ शà¥à¤šà¤¿à¤à¥‚त मनसà¥à¤µà¥€ शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी को महा मना जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤§à¤° जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मà¥à¤¨à¤¿ पंगव गà¥à¤°à¥ पà¥à¤°à¤µà¤° का सहजतया सà¥à¤¯à¥‹à¤— मिल ही गया तथा संतरतà¥à¤¨ तपसà¥à¤µà¥€ राज को सà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ शिषà¥à¤¯ का मिलाप होना सोने में सà¥à¤—ंध वाली बात हो गई।शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी के उतà¥à¤¤à¤® à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को समà¥à¤¯à¤•तया जानकर मà¥à¤¨à¤¿ पà¥à¤°à¤µà¤° ने अपने निकट रहने की सà¥à¤µà¥€à¤•ृति दे दी।
सà¥à¤µà¥€à¤•ृति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी का मन फूला नहीं समाया उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ असीम आनंद का अनà¥à¤à¤µ हà¥à¤† जैसे जौहरी को सचà¥à¤šà¤¾ हीरा मिला वैसे ही मानस-मणि के पारखी को गà¥à¤°à¥à¤°à¥‚प हीरा पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गया। जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ - जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ सनà¥à¤¨à¤¿à¤•टता बढ़ती गई तà¥à¤¯à¥‹à¤‚ - तà¥à¤¯à¥‹à¤‚ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¤‚डार गणेशमलजी को मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¹à¤¸à¥à¤¤ मिलता गया। बेलापà¥à¤° से चतà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ समापà¥à¤¤à¤¿ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ तपसà¥à¤µà¤¿à¤°à¤¾à¤œ की विहार यातà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठहà¥à¤ˆà¥¤ आपशà¥à¤°à¥€ के साथ शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी वैरागी à¤à¥€ थे।धरà¥à¤®-पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करते हà¥à¤ तपसà¥à¤µà¥€ राजशà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¤¾à¤œà¤œà¥€ महाराज के चरण कमल “नगर शूल” गांव तक पहà¥à¤‚चे, यह वही गांव है जहां से कà¥à¤› महीनों पूरà¥à¤µ शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी के साथ à¤à¤• शà¥à¤°à¥€à¤®à¤‚त पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का संबंध निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ करने आठथे।बेलापà¥à¤° नगर में; किंतॠवैरागà¥à¤¯ रस की पावन गंगा में सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने वाले को à¤à¥‹à¤—रूपी गंदे कीचड़ का नाला कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कर पà¥à¤°à¤¿à¤¯ होगा? कà¤à¥€ नहीं। à¤à¤—वान महावीर की वाणी में - “अनासकà¥à¤¤ आतà¥à¤®à¤¾ कामवासना को विषवत मानकर परितà¥à¤¯à¤¾à¤— करती हà¥à¤ˆ करà¥à¤®à¤¬à¤‚धन से मà¥à¤•à¥à¤¤ होने का सतत पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती है।
दीकà¥à¤·à¤¾ : नगर शूल निवासी मानà¥à¤¯à¤µà¤° शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ी शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ खेमचंद जी बाफना à¤à¤µà¤‚ उनकी धरà¥à¤®à¤ªà¤¤à¥à¤¨à¥€ सà¥à¤¶à¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤•ा à¤à¤®à¤•ू बाई को पता लगा कि तपसà¥à¤µà¥€ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¤¾à¤œà¤œà¥€ महाराज नगर शूल में पधारे हैं उनके साथ à¤à¤• दीकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¥€ है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यह à¤à¥€ जानकारी हà¥à¤ˆ कि यह वही मà¥à¤®à¥à¤•à¥à¤·à¥ है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हम अपनी कनà¥à¤¯à¤¾ अरà¥à¤ªà¤£ कर रहे थे। बींद (वर) बनने वाला आज वैरागी के रूप में आ गया है। जिनकी दीकà¥à¤·à¤¾ लेने की तीवà¥à¤° अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न यह सेवा का सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¿à¤® लाठअपन लेवें?
विचारानà¥à¤°à¥‚प à¤à¤®à¤•ॠबाईअपने पतिदेव से बोली - तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ से विनती करो कि आपशà¥à¤°à¥€ के साथ जो à¤à¥€ बैरागी à¤à¤¾à¤ˆ हैं उनकी शà¥à¤ दीकà¥à¤·à¤¾ अपने घर से हो, हम यही चाहते हैं। दीकà¥à¤·à¤¾ जैसा पवितà¥à¤° कारà¥à¤¯ और कà¥à¤¯à¤¾ होगा? हमारी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को सफल बनाने में आप शà¥à¤°à¥€ सहयोग दें। बाफना जी को à¤à¥€ यह बात उचित लगी, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ के शà¥à¤°à¥€ चरणों में पहà¥à¤‚चकर विनमà¥à¤° निवेदन कर आगà¥à¤°à¤¹ किया कि यह शà¥à¤ लाठहमें दीरावें।
बाफना जी के आगà¥à¤°à¤¹ à¤à¤°à¥‡ निवेदन को तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ ने यथारà¥à¤¥ रूप में समà¤à¤¾ फिर बैरागी गणेशमलजी की जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ जानने के लिठउनसे कहा - सेठखेमचंदजी तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ दीकà¥à¤·à¤¾ करवाना चाहते हैं - बोलो अब संयम सà¥à¤µà¥€à¤•ार करना है या कà¥à¤› दिनों - महीनों बाद। शà¥à¤°à¥€ गणेशमलजी अब तक महाराज शà¥à¤°à¥€ के निकट रहते हà¥à¤ बहà¥à¤¤ कà¥à¤› जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की बातें सीख चà¥à¤•े थे।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ आप शà¥à¤°à¥€ ने फरमाया कि इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯ विजेता को समय मातà¥à¤° का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¦ नहीं करना चाहिà¤, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ समय को मूलà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ समà¤à¤•र संयम में पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ करना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। तो फिर मैं अब दिन और महीने वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ ही कैसे वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ कर सकता हूà¤? इतना समय जो बीता है उसका à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ दà¥:ख है पर करता à¤à¥€ कà¥à¤¯à¤¾? अंतराय करà¥à¤® जो ठहरा। अब तो आप कहीं à¤à¥€ दीकà¥à¤·à¤¾ दे, मैं बिलà¥à¤•à¥à¤² तैयार हूं। गणेशमलजी ने उतà¥à¤¸à¥à¤•ता से अपना à¤à¤¾à¤µ पà¥à¤°à¤•ट किà¤à¥¤
दीकà¥à¤·à¤¾ लेने तथा देने वाला दोनों ही जब तैयार हैं फिर देर किस बात की। महाराज शà¥à¤°à¥€ ने सà¥à¤µà¥€à¤•जी का दिल हरà¥à¤· से à¤à¤° दिया।
बस बात सारे नगर में फैल गई à¤à¤• विरकà¥à¤¤ आतà¥à¤®à¤¾ संयम पथ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर रही है। चारों ओर सीमातीत हरà¥à¤· की लहर दौड़ गई। विकà¥à¤°à¤® संवत 1970 मृगसर सà¥à¤¦à¥€ नवमी का शà¥à¤ दीकà¥à¤·à¤¾ दिन निकाल दिया, तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° नवमी के दिन वैरागà¥à¤¯à¤¨à¤‚दी गणेशमलजी का बढ़े ठाठके साथ दीकà¥à¤·à¤¾ महोतà¥à¤¸à¤µ मनाया। दीकà¥à¤·à¤¾ देते समय महान तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¤¾à¤œà¤œà¥€ महाराज ने विशाल जनसमूह को संदेश देते हà¥à¤ दीकà¥à¤·à¤¾ जीवन के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का वरà¥à¤£à¤¨ किया, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा जिनपथ की शà¥à¤°à¤®à¤£ दीकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¥€à¤•ार करने वालीà¤à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¾ आतà¥à¤®à¤—à¥à¤£à¥‹à¤‚ में रमण करने वाली होती है। जिसके जीवन में शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤°à¥‚पी नींव à¤à¤µà¤® आतà¥à¤® सरोवर के à¤à¤¾à¤µà¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की वजà¥à¤°à¤®à¤¯ à¤à¤¿à¤¤à¥à¤¤à¤¿ होती है, सतà¥à¤°à¤¹ पà¥à¤°à¤•ार के संयम जिसके सोपान है, संतोष जिसका दरवाजा है, चार पà¥à¤°à¤•ार की समाधि आराम, पंच समिति तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ जिसकी सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ छत है, बारह पà¥à¤°à¤•ार के तप जिसके लौह सà¥à¤¤à¤‚ठहैं, दस यति धरà¥à¤® जिसकी अलमारियां हैं, सदà¥à¤—à¥à¤£ (सतà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¸ गà¥à¤£) रूपी रतà¥à¤¨ जिस à¤à¤‚डार की आलमारियों में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहते हैं, समà¥à¤¯à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का उजà¥à¤œà¤µà¤² पà¥à¤°à¤¦à¥€à¤ª जहां जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¨ है, शांति तथा समता के निरà¥à¤®à¤² नीर से जो आपूरित हैं, 12 à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤°à¥‚पी कमल जहां खिलते हैं। à¤à¤¸à¤¾ शà¥à¤°à¤®à¤£ धरà¥à¤® निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¥€ है।
समाज के बीच गणेशमलजी जैन आहरà¥à¤¤à¤¾ दीकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर रहे हैं। मेरी इन से यही अपेकà¥à¤·à¤¾ है कि नवदीकà¥à¤·à¤¿à¤¤ मà¥à¤¨à¤¿ अपने कà¥à¤² को तो उजà¥à¤œà¤µà¤² जरूर करेंगे ही साथ ही मनी मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤“ं का उचà¥à¤šà¤¤à¤® पालन करते हà¥à¤ जिन शासन की शोà¤à¤¾ में पृथà¥à¤µà¥€ पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ करेंगे ही साथ ही मà¥à¤¨à¤¿ मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤“ं का उचà¥à¤šà¤¤à¤® पालन करते हà¥à¤ जिनशासन की शोà¤à¤¾ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤² पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ अà¤à¤¿à¤µà¥ƒà¤¦à¥à¤§à¤¿ करेंगे।
संयम यातà¥à¤°à¤¾ : इस तरह आपकी संयम यातà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठहो गई आपने अपने गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताठगठआदरà¥à¤¶à¥‹à¤‚ का पालन करते हà¥à¤ उतà¥à¤¤à¤® à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के साथ à¤à¤• - à¤à¤• विगय अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ दूध - दही - घी - मिषà¥à¤ ान पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤•-à¤à¤• का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— करते हà¥à¤ संयम पथ पर आगे बढ़ते रहें à¤à¤• समय आहार लेना साथ ही पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤• विगय को छोड़ना कोई कम बात नहीं। दीकà¥à¤·à¤¾ लेने के कà¥à¤› समय बाद से ही आपने तप आराधन पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठकर दिया तथा जीवन परà¥à¤¯à¤‚त उसका पालन किया à¤à¤•ांतर तप उपवास तो आयà¥à¤·à¥à¤¯à¤à¤° करते रहे साथ ही तेले आदि तपसà¥à¤¯à¤¾ बीच-बीच में करते रहे आगमों पर आपकी अतà¥à¤¯à¤‚त शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ थी आगमों का आप नियमित सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ करते थे 45 आगमो को आपने अपने हाथ से लिपिबदà¥à¤§ किया था।
शà¥à¤¦à¥à¤§ खादी पहनने के विशेष हिमायती थे जब गांधीजी के अहिंसा और खादी के आवाज उठी तब से ही आपने अपने तन पर खादी धारण कर ली अपने उपासक को खादी का उपदेश देते और आगे चलकर तो खादी धारकों से ही बात करते उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने जीवन में खादी का विशेष पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° किया उनकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से खादी à¤à¤‚डार चलता था। आप की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ à¤à¤µà¤‚ उपदेश से कइयों ने खादी धारण कर अनà¥à¤¯ वसà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ का तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर दिया था। आप गौ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ दयालॠà¤à¤µà¤‚ रकà¥à¤·à¤• थे। जब à¤à¤¾à¤°à¤¤ में गाय कतà¥à¤²à¤–ाने में जाने लगी तब आपको पीड़ा पहà¥à¤‚ची। आप की मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ थी कि यदि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¥€ घर – घर में गाय पालने लग जाठतो कतà¥à¤²à¤–ानों में गाय नहीं जाà¤à¤‚गी। आप की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से अनेक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर गोशाला खà¥à¤²à¥€ और आज à¤à¥€ कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ है।
आप परंपरा पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€, धारà¥à¤®à¤¿à¤• परंपरा के पोषक थे तथा उसका कटà¥à¤Ÿà¤°à¤¤à¤¾ से पालन करने कराने के हिमायती थे। शà¥à¤¦à¥à¤§ जैनतà¥à¤µ के पà¥à¤°à¤¬à¤² पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤• थे आप के समीप खà¥à¤²à¥‡ मà¥à¤‚ह ( बिना मà¥à¤‚हपतà¥à¤¤à¥€ ) बैठने वाले को फटकार देते, कà¤à¥€-कà¤à¥€ तो वहां से उठाकर बाहर à¤à¥‡à¤œ देते थे। आप शà¥à¤°à¥€ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से कईयों ने अपने शà¥à¤¦à¥à¤§ जैन धरà¥à¤® को पहचाना। आपके सानिधà¥à¤¯ में आने वालों से आप तपसà¥à¤¯à¤¾ करवाते थे।
सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ारोहण : जीवन के अंतिम समय में आपके अमृत वचन हे देवानà¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¯ शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•ों नाशवान देह की अब कà¥à¤¯à¤¾ चिंता करना यह तो परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² है, इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिंता जà¥à¤žà¤¾à¤¨, दरà¥à¤¶à¤¨, और चरितà¥à¤° की होनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उतà¥à¤¤à¤® धरà¥à¤® आराधना जैसा शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ कारà¥à¤¯ दूसरा कोई नहीं है। मन तो कà¤à¥€ का अंदर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ पा गया है अब इस मकान में चंद दिनों के लिठबसेरा अवशà¥à¤¯ करना है।
बाहर इसीलिठखड़ा हूं कि आप लोग मेरी शरà¥à¤¤ मंजूर करो तो गौशाला में मेरा पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ हो, मेरी शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ इस पà¥à¤°à¤•ार है -
मेरे पास दरà¥à¤¶à¤¨, पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨, पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ में आने वाले बड़ी उमà¥à¤° वाले नर - नारी जूते, चपà¥à¤ªà¤², बूट आदि पहनकर नहीं आवे।
बिना मà¥à¤‚ह पतà¥à¤¤à¥€ बांधे कोई à¤à¥€ मेरे यहां पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नहीं करें।
आधà¥à¤¨à¤¿à¤• वेश सूट - बूट, कोट - पेंट पहन कर नहीं आवे।
और ना ही आधà¥à¤¨à¤¿à¤• बाल कटिंग वाला आवे।
- सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤• में बिना सामायिक कोई ना बैठे।
- शà¥à¤¦à¥à¤§ खादी के वसà¥à¤¤à¥à¤° पहनने वाले से ही मैं बात करूंगा।
अलà¥à¤ªà¤¾à¤µà¤§à¤¿ की असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ ने आपको अतà¥à¤¯à¤‚त ही कमजोर कर दिया। डॉकà¥à¤Ÿà¤° वैदà¥à¤¯ की दवा लेने से इंकार कर दिया। आपका मानना कि तप की दवा ही शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है। शà¥à¤ संकलà¥à¤ª माघ माह के कृषà¥à¤£ पकà¥à¤· की तà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤¦à¤¶à¥€ के दिन संधà¥à¤¯à¤¾ के समय जालना चतà¥à¤°à¥à¤µà¤¿à¤¦ संघ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आपने जीवन परà¥à¤¯à¤‚त के लिठसंथारा सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया इस अवसर पर सेवा में विराजित तपसà¥à¤µà¥€ शà¥à¤°à¥€ बसंत मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज ने à¤à¥€ तपसà¥à¤µà¥€à¤°à¤¾à¤œ शà¥à¤°à¥€ गणेशजी महाराज के मà¥à¤–ारविंद से 8 तक के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤–ान लिठअनà¥à¤¯ अनेकों à¤à¤¾à¤ˆ बहनों ने à¤à¥€ तेले गà¥à¤°à¤¹à¤£ किà¤à¥¤ बौदà¥à¤§à¤¿à¤• शरीर उतà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° शिथिल हो रहा था। करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• गजकेसरी शà¥à¤°à¥€ गणेशीलाल जी महाराज शारीरिक वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿ से मà¥à¤•à¥à¤¤ होने की आकांकà¥à¤·à¤¾ रखते हà¥à¤ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ सà¥à¤§à¤¾ का पान करने में शांत à¤à¤¾à¤µ में निमगà¥à¤¨ थे। इस तरह विकà¥à¤°à¤® संवत 2018 माघ बदी अमावसà¥à¤¯à¤¾ (ई. सन 04.02.1962) के दिन 8:45 पर करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• गज केसरी जी महाराज पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ शरीर से संबंधित सम à¤à¤¾à¤µ में सà¥à¤µà¤°à¥à¤— की महान यातà¥à¤°à¤¾ पर चल दिà¤à¥¤ जिन शासन का à¤à¤• महान रतà¥à¤¨ सब को छोड़कर दिवà¥à¤¯ आलोक में विलीन हो गया। आपके सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤• गणेश धाम, जालना पर जैन और जैनेतर दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ आते है और कृतारà¥à¤¥ हो जाते है।
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लेखक :- सà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° मारू, इंदौर ( +91 98260 26001)
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