शà¥à¤°à¤®à¤£ संघीय उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£à¤‹à¤·à¤¿à¤œà¥€ - संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ जीवन परिचय
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शà¥à¤°à¤®à¤£ संघीय उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£à¤‹à¤·à¤¿à¤œà¥€ महाराज इस यà¥à¤— के à¤à¤¸à¥‡ जाने-माने संत हैं, जो अपनी पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ व साधना से संपूरà¥à¤£ मानव जाति को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर रहे हैं। आपका जनà¥à¤® में 7 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर, 1957 को पिता शà¥à¤°à¥€ दगडूलालजी देसरड़ा के घर आंगन गà¥à¤°à¤¾à¤®-घोड़ेगांव, जिला-à¤à¥à¤¸à¤¾à¤µà¤² (महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°) à¤à¤µà¤‚ माता शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ चमà¥à¤ªà¤¾à¤¬à¤¾à¤ˆ देसरड़ा की रतà¥à¤¨ कà¥à¤•à¥à¤·à¤¿ से हà¥à¤†à¥¤
यह परिवार पहले से ही अतà¥à¤¯à¤‚त ही धारà¥à¤®à¤¿à¤• परिवार रहा है। धरà¥à¤® धà¥à¤µà¤œà¤¾ की छांव में ही बालक का नाम पà¥à¤°à¤•ाश रखा गया। बचपन के संसà¥à¤•ार व बाल सà¥à¤²à¤ कà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¼à¤¾à¤“ं से बालक माता-पिता के साथ परिवार का मन मोह कर बड़ा हो रहा था। माता-पिता उसे मà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के धरà¥à¤®à¥‹à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ ले जाने लगे।
à¤à¤• दिन à¤à¤• मà¥à¤¨à¤¿ à¤à¤—वंत का पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ चल रहा था, अचानक मां का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ बालक की ओर गया। वह तीन वरà¥à¤· का बालक मà¥à¤¨à¤¿ महाराज को निहारते हà¥à¤ उनके अनमोल बोल को इतने धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से सà¥à¤¨ रहा था कि मानों वह उनके à¤à¤•-à¤à¤• शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के अरà¥à¤¥ अचà¥à¤›à¥‡ से समठरहा हो। मां ने सोचा, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कौतà¥à¤¹à¤² होता है, उतà¥à¤¸à¥à¤•ता होती है और यह बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ इसी वशीà¤à¥‚त मà¥à¤¨à¤¿ à¤à¤—वंत के वचनों में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगा रहा है। बालक थोड़ा और बड़ा हà¥à¤†, अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के जैसे उसका à¤à¥€ लालन पालन हो रहा था, पाठशाला à¤à¥€ जाने लगा। मां à¤à¤• बात धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दे रही थी कि बालक अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तरह नहीं है। वरà¥à¤£ व ईशà¥à¤µà¤° के सà¤à¥€ नाम उसे सà¥à¤®à¤°à¤£ हो चà¥à¤•े हैं और विलकà¥à¤·à¤£ तरीके से वह ईशà¥à¤µà¤° नाम लेता रहता है। यह संकेत था कि यह बालक साधारण नहीं है। लेकिन जब à¤à¥€ संतों की संगत मिलती तो यह बालक मानों आतà¥à¤®à¤¿à¤• आनंद, सà¥à¤–, पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ व आनंद में डूब जाता।
बचपन से ही अतà¥à¤¯à¤‚त मेधावी व धारà¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के बालक ने वरà¥à¤· 1973 में दसवीं की परीकà¥à¤·à¤¾ दी और अचानक माता-पिता से कहा- अब मà¥à¤à¥‡ धरà¥à¤® मारà¥à¤— पर चलना है। यह सà¥à¤¨à¤•र मात-पिता चौंक गठऔर उसे आचारà¥à¤¯ आनंदऋषिजी के पास ले गà¤à¥¤à¤†à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ आनंदऋषिजीने बालक की पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ व धरà¥à¤® की ओर रूà¤à¤¾à¤¨ देखा तो देखते रह गठऔर माता-पिता को सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया कि इसे धरà¥à¤® के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में, धरà¥à¤® मारà¥à¤— में रत करें।
आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आनंदऋषिजी का धरà¥à¤®à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ पाकर बालक को धरà¥à¤® की सेवा के लिठदेने का संकलà¥à¤ª लिया। लगà¤à¤— 1वरà¥à¤· तक बालक पà¥à¤°à¤•ाश वैरागà¥à¤¯ काल में रहकर जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤œà¤¨ करने में रत रहा। अंतत: दीकà¥à¤·à¤¾ का शà¥à¤ पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग दिनांक 24 मारà¥à¤š, 1974 को आ ही गया जिस दिन आचारà¥à¤¯ आनंदऋषिजी महाराज ने बालक पà¥à¤°à¤•ाश को को विधिवतॠदीकà¥à¤·à¤¾ देकर मà¥à¤¨à¤¿ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ ऋषि बना कर धरà¥à¤® की शरण में ले लिया। आचारà¥à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ के सानिधà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ ऋषिजी ने संयम पथ अंगीकार कर à¤à¤• सारà¥à¤¥à¤• जीवन जीने के पथ का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ किया। मà¥à¤¨à¤¿ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ ऋषि जी ने संयम जीवन में सà¤à¥€ जैन सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कर, उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¯à¤¨ सूतà¥à¤° को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ किया। धारà¥à¤®à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ सिधà¥à¤¦à¤¾à¤‚ताचारà¥à¤¯, नरà¥à¤•शासà¥à¤¤à¥à¤°, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°, 32 आगमों का गहन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के साथ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨ शासà¥à¤¤à¥à¤° का गहरा अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ अनà¥à¤¯ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ के साहितà¥à¤¯ विशेषकर गीता, रामायण, महाà¤à¤¾à¤°à¤¤, का à¤à¥€ पठन-पाठन किया।
आपके वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¨ में अमृतरूपी जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वरà¥à¤·à¤¾ होती रहती है। à¤à¤•à¥à¤¤ मनà¥à¤¤à¥à¤° मà¥à¤—à¥à¤§ होकर घंटों आपकी वाणी à¤à¤•ागà¥à¤° चितà¥à¤¤ होकर सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ रहते हैं। तीरà¥à¤¥à¤‚करों के जनà¥à¤® दिवस अथवा निरà¥à¤µà¤¾à¤£ पर रातà¥à¤°à¤¿ के शांत वातावरण में जब आप à¤à¤• मनोहारी लय में उन कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ का à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤®à¤¯ वरà¥à¤£à¤¨ करतें हैं तो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ धरà¥à¤®-अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® के उस सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨à¤²à¥‹à¤• में पहà¥à¤‚च जाता है,जहां अनà¥à¤ªà¤® पल का साकà¥à¤·à¥€ बनने जैसा आà¤à¤¾à¤¸ होता है।
आपका धà¥à¤¯à¥‡à¤¯ यà¥à¤µà¤¾ वरà¥à¤— में सà¥à¤¸à¤‚सà¥à¤•ारों का बीजारोपण करना, वà¥à¤¯à¤¸à¤¨ मà¥à¤•à¥à¤¤ जीवन की कला सिखाना, उनमें नैतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ करना तथा आदरà¥à¤¶ जीवन हेतॠमारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ देना है। आप कहते हैं कि परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच पà¥à¤°à¥‡à¤®, समनà¥à¤µà¤¯ व शांति का वातावरण बना रहता है तो घर ही मंदिर बन जाता है।
देशà¤à¤° में विहार कर ऋषि परिवार और समाज को सदमारà¥à¤— पर ले जाने à¤à¤µà¤‚ परिवार के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ पूरा करने के साथ सामाजिक धरà¥à¤® व राषà¥à¤Ÿà¥à¤° धरà¥à¤® निà¤à¤¾à¤¨à¥‡ की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ à¤à¥€ देते हैं। आपके शिषà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥‡à¤¯à¤¸à¤‹à¤·à¤¿ जी म. सा. / मधà¥à¤° गायक शà¥à¤°à¥€ तीरà¥à¤¥à¥‡à¤¶à¤‹à¤·à¤¿à¤œà¥€ म. सा. रहे है।
आप उचà¥à¤š कोटि के दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• व महान संत हैं ।आप पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤•ार पराकà¥à¤°à¤® धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना, अरà¥à¤¹à¤® धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना, अषà¥à¤Ÿà¤®à¤‚गल धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤‚धाता व पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¾ हैं।
आपकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से कई धारà¥à¤®à¤¿à¤• संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚-गà¥à¤°à¥ आननà¥à¤¦ फोंडेशन, आननà¥à¤¦ मरà¥à¤§à¤° केसरी मधà¥à¤•र टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ चेनà¥à¤¨à¤ˆ, गौतम निधी गौतम लबà¥à¤§à¥€ गौतमालय , शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• संसà¥à¤¥à¤¾–आननà¥à¤¦ मधà¥à¤•र विदà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€à¤ संसà¥à¤¥à¤¾ आज à¤à¥€ समाजहित में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ है। अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• विकास के लिठआपने अरà¥à¤¹à¤® विजà¥à¤œà¤¾ फाउंडेशन की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की। अरà¥à¤¹à¤® विजà¥à¤œà¤¾ के अंतरà¥à¤—त अनेको शिविरों à¤à¤µà¤‚ जिन-शासन साधना दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समसà¥à¤¤ मानव समाज लाà¤à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¿à¤¤ हो रहा है।
आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखित समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ साहितà¥à¤¯ की सूची : शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण सूतà¥à¤° का समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ / ऋषि पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ सामयिक साधना विवेचन / अरà¥à¤¹à¤® गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार ( हिनà¥à¤¦à¥€ à¤à¤µà¤‚ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ ) आननà¥à¤¦ गाथा / महावीर गाथा इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤
आप जिनशासन की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ करते हà¥à¤ अपने लकà¥à¤·à¥à¤¯ तक पहà¥à¤‚चने में सफल हो, आपका पावन मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ संघ, समाज और परिवार को मिलता रहे।
आप दीरà¥à¤˜à¤¾à¤¯à¥ हों, आपशà¥à¤°à¥€ के पावन चरणों में सादर वंदन ….नमन…. अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨à¥¤
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लेखक :- सà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° मारू, इंदौर ( +91 98260 26001)
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