जैन धरà¥à¤® की विविधता में à¤à¤•ता की तलाश
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अनिल जैन, अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· अहिंसा फाऊंडेशन
जैन धरà¥à¤®: à¤à¤•ता और समृदà¥à¤§à¤¿ की दिशा में :
जैन धरà¥à¤® विशà¥à¤µ के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤® धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है, जिसकी जड़ें आदिकाल से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ हैं। तीरà¥à¤¥à¤‚कर महावीर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त आज के संदरà¥à¤ में अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हैं। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में, जैन धरà¥à¤® के पाà¤à¤š मूल सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त-अहिंसा, सतà¥à¤¯, असà¥à¤¤à¥‡à¤¯, बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤šà¤°à¥à¤¯ और अपरिगà¥à¤°à¤¹-समाज की अनेक जटिल समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का समाधान पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करते हैं। इन सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों का पालन न केवल वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ करता है, बलà¥à¤•ि विशà¥à¤µà¤¶à¤¾à¤‚ति और सामाजिक सदà¥à¤à¤¾à¤µ को à¤à¥€ सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼à¤• रता है।
यह हमारे लिठसौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की बात है किह में जैन धरà¥à¤® की महान परंपरा विरासत में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ˆ है। इस धरà¥à¤® कीउ दारता और उचà¥à¤š आदरà¥à¤¶à¥‹à¤‚ के कारण अनà¥à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ à¤à¥€ इस का आदर करते हैं और इसे समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¤¨à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से देखते हैं।
विà¤à¤¾à¤œà¤¨ की पीड़ा और समाज की वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ :
किनà¥à¤¤à¥ यह अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤–द à¤à¤µà¤‚ चिंताजनक है कि जैन समाज आज अनेक छोटे-छोटे समूहों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ हो गया है। हमारे समाज की जनसंखà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की कà¥à¤² जन संखà¥à¤¯à¤¾ का 1% à¤à¥€ नहीं है, फिर à¤à¥€ हम विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚, पूजा-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, तीरà¥à¤¥à¤‚करों, आचार-विचारों, साहितà¥à¤¯, मंदिरों, सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤•ों और तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के आधार पर बंटे हà¥à¤ हैं। इस विà¤à¤¾à¤œà¤¨ ने सामाजिक समरसता को बाधित किया है। आज सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ यह है कि हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को जैन तो कहते हैं, परंतॠà¤à¤•-दूसरे को अपने पारिवारिक आयोजनों में आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने तक में संकोच करते हैं।हमारे साधà¥-संत à¤à¥€ à¤à¤• ही मंच पर विराजमान होकर पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ देने से कतराते हैं।
समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान: à¤à¤•ता की ओर बढ़ते कदम :
यदि हमारे तीरà¥à¤¥à¤‚कर और आराधà¥à¤¯ à¤à¤• हैं, तो फिर हम इतने विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हैं? यदि अतीत में कोई à¤à¤¸à¥€ घटनाà¤à¤ हà¥à¤ˆ थीं, जिनकी वजह से य हवि à¤à¤¾à¤œà¤¨ हà¥à¤†, तो अब समय आ गया है कि हम उन à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को à¤à¥à¤²à¤¾à¤•र à¤à¤• सशकà¥à¤¤ और समृदà¥à¤§ जैन समाज की रचना करें। समय-समय पर समाज में इस विषय पर चिंतन तो हà¥à¤†, किनà¥à¤¤à¥ ठोस निरà¥à¤£à¤¯ नहीं निकल सका। कà¥à¤› पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ अवशà¥à¤¯ किठगà¤, किंतॠइन पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को शीरà¥à¤· नेतृतà¥à¤µ और संतसमाज का संपूरà¥à¤£ सहयोग नहीं मिल सका। बाहरी रूप से à¤à¤•ता की बातें की जाती हैं, परंतॠà¤à¥€à¤¤à¤° की अपेकà¥à¤·à¤¾à¤à¤ और मतà¤à¥‡à¤¦ राह में बाधक बने हà¥à¤ हैं।
संगठन की à¤à¥‚मिका और à¤à¤• जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ की आवशà¥à¤¯à¤•ता :
आज समय बदल रहा है, और हमें इस बदलाव के अनà¥à¤°à¥‚प सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को तैयार करना होगा। कà¥à¤› अनà¥à¤¯ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€, जो धारà¥à¤®à¤¿à¤• समानता में विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ नहीं रखते, जैन सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों को à¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं करते। कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ हैं, जिनके दृषà¥à¤Ÿà¤¿ कोण हमारे धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सकारातà¥à¤®à¤• नहीं हैं। à¤à¤¸à¥€ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जैन समाज का à¤à¤•जà¥à¤Ÿ होना अतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• है।
यदि हमने समय रहते à¤à¤•ता सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ नहीं की, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे करोड़ों-अरबों की लागत से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ मंदिरों और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤•ों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ संकट में पड़ जाà¤à¤—ी। हमारे शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤, सकà¥à¤·à¤® और समृदà¥à¤§à¤ª रिवारों को अपनी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिठआशà¥à¤°à¤¿à¤¤ होना पड़ेगा।
सारà¥à¤¥à¤• पहल की आवशà¥à¤¯à¤•ता :
मेरी समसà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§ जैन समाज से विनमà¥à¤° अपील है कि यदि आप अपनी पूजा-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿, अपने गà¥à¤°à¥ परंपरा और अपनी धारà¥à¤®à¤¿à¤• मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं को नहीं बदल सकते, तो न बदलें। किंतॠइतना अवशà¥à¤¯ करें कि जब आप अपने मंदिरों और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤•ों से बाहर आà¤à¤, तो सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को केवल' जैन' समà¤à¥‡à¤‚। à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤²à¥‡ ही आप किसी à¤à¥€ परंपरा के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ हों, किंतॠसमाज में हमें à¤à¤•ता का परिचय देना होगा।
यदि यह à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ संपूरà¥à¤£ समाज में विक सित हो जाती है, तो यह हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी और हमारे लकà¥à¤·à¥à¤¯ की ओर à¤à¤• बड़ा कदम साबित होगा। आशा है कि आप सà¤à¥€ इस à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को समà¤à¥‡à¤‚गे और सकारातà¥à¤®à¤•ता के साथ इस पर विचार करेंगे। हमारी' अहिंसा फाउंडेशन' की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥€ इसी उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के साथ की गई है कि समाज में जैन à¤à¤•ता को पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जा सके। आइà¤, हम सब मिलकर à¤à¤• सशकà¥à¤¤ और संगठित जैन समाज का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करें।
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Mail to : Ahimsa Foundation
www.jainsamaj.org
R25022025
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