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जनगणना का फॉर्म सामने रखा है। परिवार बैठा है। कोई पूछता है, "धर्म वाले कॉलम में क्या लिखें?" एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "जैन लिख दो।" दूसरा रोकता है, "रुको, कहीं जैन लिखने से OBC का फायदा बंद तो नहीं हो जाएगा?" तीसरा कहता है, "छोड़ो, हिंदू लिख दो, कोई झंझट नहीं।"  यह संवाद काल्पनिक नहीं है। यह पिछले कई दशकों से लाखों जैन घरों में होता आया है। और इसी संवाद की वजह से 2011 की जनगणना में पूरे भारत में केवल 44.5 लाख जैन दर्ज हुए। इस लेख का एक ही उद्देश्य है: उस डर को दूर करना जो हमें अपनी पहचान लिखने से रोकता है।

जैन धर्म है: यह संविधान भी कहता है………जैन धर्म एक स्वतंत्र, प्राचीन और स्वयंपूर्ण धर्म है। यह किसी अन्य धर्म की शाखा नहीं है, कोई उपसंप्रदाय नहीं है, और ही कोई जाति है। भारत सरकार ने 27 जनवरी 2014 को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के माध्यम से जैनों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया। यह दर्जा National Commission for Minorities Act, 1992 की धारा 2(c) के अंतर्गत दिया गया। यह एक statutory minority का दर्जा है, जो संसद द्वारा बनाए गए कानून पर आधारित है। भारत में किसी धर्म को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक तभी घोषित किया जाता है जब वह एक स्वतंत्र धर्म हो। जनगणना के फॉर्म में जैन हमेशा से एक अलग धर्म श्रेणी के रूप में सूचीबद्ध रहा है। जाति के कॉलम में आप अपनी जाति लिखते हैं, और धर्म के कॉलम में अपना धर्म। ये दोनों अलग-अलग प्रश्न हैं। जैन धर्म का इतिहास, उसके आगम, उसके तीर्थंकर, और उसकी दार्शनिक परंपरा हज़ारों वर्षों की है। भगवान महावीर इस परंपरा के 24वें तीर्थंकर हैं। यह धर्म अनादि है।

क्या जैन लिखने से OBC या SC/ST लाभ पर असर पड़ेगा?

नहीं। बिल्कुल नहीं। यह वह प्रश्न है जो सबसे ज़्यादा परिवारों को रोकता है। और इसका उत्तर बिल्कुल स्पष्ट है। जनगणना के फॉर्म में धर्म और जाति दो अलग-अलग कॉलम हैं। धर्म के कॉलम में "जैन" लिखने से आपके जाति प्रमाण पत्र पर कोई असर नहीं पड़ता। OBC, SC या ST का दर्जा आपकी जाति से निर्धारित होता है, आपके धर्म से नहीं। जनगणना में धर्म कॉलम और जाति कॉलम एक दूसरे को प्रभावित नहीं करते।

 

अगर आप OBC हैं, तो जाति के कॉलम में अपनी जाति लिखें। धर्म के कॉलम में "जैन" लिखें। दोनों सत्य हैं। दोनों एक साथ लिखे जा सकते हैं। SC/ST परिवारों के लिए एक विशेष जानकारी: SC का दर्जा 1950 के Presidential Order के अंतर्गत फिलहाल उन्हीं लोगों को मिलता है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म मानते हों। यह एक कानूनी स्थिति है जो न्यायालय में विचाराधीन है। जो परिवार SC श्रेणी में आते हैं, वे अपनी परिस्थिति के अनुसार कानूनी सलाह ले सकते हैं। OBC और ST परिवारों पर यह प्रावधान लागू नहीं होता।

 

Census Act, 1948 की धारा 15 के अनुसार जनगणना में दिया गया व्यक्तिगत विवरण गोपनीय है और किसी भी न्यायालय या कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं है। आपका जाति प्रमाण पत्र राजस्व अधिकारी को दिए आपके अलग आवेदन पर बनता है, जनगणना के रिकॉर्ड पर नहीं। यह भ्रम दशकों से जैन समाज को जनगणना में अदृश्य रखता आया है। अब वक्त है इसे दूर करने का।

जनगणना 2011 में क्या हुआ और 2027 में क्या बदलेगा……….2011 की जनगणना में पूरे भारत में केवल 44.5 लाख जैन दर्ज हुए। 2001 से 2011 के बीच जैन आबादी की वृद्धि दर देश में सबसे कम दर्ज हुई, केवल 5.4%, जबकि राष्ट्रीय औसत 17.7% था। इतना अंतर स्वाभाविक कारणों से नहीं समझाया जा सकता। समुदाय के अनुमान के अनुसार वास्तविक संख्या दो करोड़ या उससे अधिक हो सकती है। यह अंतर इसलिए है क्योंकि लाखों परिवारों ने धर्म के कॉलम में "जैन" की जगह कुछ और लिख दिया, या कॉलम खाली छोड़ दिया। जनगणना 2027 में पहली बार self-enumeration की सुविधा मिली थी। Phase 1 (घर-सूची) अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच था जिसमें धर्म का कॉलम नहीं था। Phase 2, Population Enumeration, देश के अधिकांश भाग में फरवरी 2027 में होगा। लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के snow-bound क्षेत्रों में यह चरण सितंबर 2026 में ही हो रहा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-snow-bound क्षेत्रों में self-enumeration 16 नवंबर 2026 से शुरू होगा और घर-घर गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक होगी। इसी चरण में धर्म का कॉलम भरा जाएगा। Phase 2 में भी self-enumeration का विकल्प होगा, और उसके बाद enumerator की यात्रा अनिवार्य है। दोनों चरण मिलकर आपकी गिनती पूरी करते हैं। धर्म और जाति के बारे में विस्तृत कानूनी और ऐतिहासिक जानकारी के लिए पढ़ें: Is Jain a religion or caste?

 

जनगणना 2027 में जैन समुदाय की भूमिका समझने के लिए देखें: Jain Census 2027

धर्म के कॉलम में "जैन" लिखिएअगले जनगणना फॉर्म में जब वह प्रश्न आए, तो उत्तर सरल है।

धर्म के कॉलम में लिखिए: जैन। गोत्र, जाति का नाम, हिंदू-जैन। सिर्फ जैन। जनगणना में सम्प्रदाय भी नहीं पूछा जाता। दिगंबर हों या श्वेतांबर, स्थानकवासी हों या तेरापंथी, धर्म के कॉलम में उत्तर एक ही है: जैन। यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है। यह वह सत्य है जो हमारे घरों में, हमारे मंदिरों में, हमारे आचार में, और हमारी परंपरा में हज़ारों साल से जीवित है। जो गिनती में है, वही नीति में है। जो दिखता है, वही बचता है। पहली बार, गिनती हमारे अपने हाथ में है।

 

92898-11008 पर एक मिस्ड कॉल दें और Let Every Jain Count अभियान से जुड़ें। अधिक जानकारी के लिए leteveryjaincount.info पर जाएं।

 

जय जिनेन्द्र।

 



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