शिकà¥à¤·à¤¾ और शिषà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की चिनà¥à¤¤à¤¾
- शà¥à¤°à¤®à¤£ डॉ पà¥à¤·à¥à¤ªà¥‡à¤‚दà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿
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आषाढ़ मास की पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ को गà¥à¤°à¥ पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ के नाम से जाना जाता है। इस दिन गà¥à¤°à¥ चरणों की पूजा का विधान पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ है अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ गà¥à¤°à¥à¤“ं के बताà¤à¤ रासà¥à¤¤à¥‡ पर चलना। कà¥à¤¯à¥‚à¤à¤•ि गà¥à¤°à¥ कà¤à¥€ à¤à¥€ किसी को à¤à¥€ ग़लत राह पर चलने की शिकà¥à¤·à¤¾ - दीकà¥à¤·à¤¾ नहीं देता है।
गà¥à¤°à¥ पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ के साथ ही चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ का à¤à¥€ शà¥à¤à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ हो जाता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• धरà¥à¤® गà¥à¤°à¥ अपने अपने तौर तरीक़ों से चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कर जन कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤•ारी उपदेशों के माधà¥à¤¯à¤® से शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं को अपना जीवन सातà¥à¤µà¤¿à¤• व सदाचार यà¥à¤•à¥à¤¤ करने का संदेश देते हैं।
जैन परंपरा के साधà¥à¤“ं का चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ à¤à¥€ आज के दिन ही शà¥à¤°à¥‚ होता है, वहीं परिवà¥à¤°à¤¾à¤œà¤• संनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का चारà¥à¤¤à¥à¤®à¤¾à¤¸ वà¥à¤°à¤¤ à¤à¥€ इसी पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ से आरंठहोता है। साधॠ- संत चार माह तक à¤à¤• ही सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रहते हैं। इन चार महिनों में वे अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨, अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ करते हैं। इस दिन का महतà¥à¤µ इसलिठà¤à¥€ है कि समाज के सारे लोग नया काम गà¥à¤°à¥ का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ लेकर आज के ही दिन शà¥à¤°à¥‚ करते हैं।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति में गà¥à¤°à¥à¤“ं को बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सन दिया गया है। इसलिठतो कबीर ने कहा है कि गà¥à¤°à¥ गोविंद दोउ खड़े, काके लागू पांय, बलिहारी गà¥à¤°à¥ आपणी कोद दियो मिलाय। आज के दौर में हमें पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ गà¥à¤°à¥à¤“ं की जरूरत महसूस हो रही है।
à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤•तावाद के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के कारण आज गà¥à¤°à¥à¤“ं की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा में कमी आई, अचà¥à¤›à¥‡ गà¥à¤°à¥à¤“ं को अà¤à¤¾à¤µ हà¥à¤† है। सोशलिसà¥à¤Ÿ नेटवरà¥à¤•िंग पर आज अलग अलग विचारों के गà¥à¤°à¥ आपको मिल जाà¤à¤‚गे पर वो सà¥à¤µà¤‚à¤à¥‚ गà¥à¤°à¥ आपको सही दिशा राह नहीं दे सकते है। आज के तथाकथित गà¥à¤°à¥ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• लाठके लिठशिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर रहे इसलिठउनका महतà¥à¤µ घटा है। वो गà¥à¤°à¥ न रहकर टीचर हो गठहैं। पैसा लेकर मारà¥à¤— दिखलाने वाला गà¥à¤°à¥ नहीं हो सकता है। गà¥à¤°à¥ वह है, जो मोकà¥à¤· का मारà¥à¤— दिखाता है, आतà¥à¤®à¤¾ को परमातà¥à¤®à¤¾ से à¤à¤•ाकार करवाता है। आज गà¥à¤°à¥à¤“ं की कमी की à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– वजह पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤¾ का अंधानà¥à¤•रण और शिकà¥à¤·à¤¾ में नैतिकता का खतà¥à¤® हो जाना है।
पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤¾ के पीछे à¤à¤¾à¤—ने के कारण न तो शिकà¥à¤·à¤•ों में गà¥à¤°à¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤µ विकसित हà¥à¤† और न ही छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ में गà¥à¤°à¥ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥¤ दोबारा गà¥à¤°à¥ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हो, इसके लिठहमें अपनी शिकà¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में बदलाव करना होगा। हमें जापान के शिकà¥à¤·à¤•ों से सीखना चाहिà¤, जहां राजनेता उस बात का अनà¥à¤•रण करते हैं, जो शिकà¥à¤·à¤• कहते हैं। जबकि दूसरी ओर à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शिकà¥à¤·à¤• उस बात का अनà¥à¤•रण करते हैं, जो राजनेता कहते हैं। गà¥à¤°à¥à¤“ं को अपने आपको इतना मांजना होगा कि जापान की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में होने लग जाà¤à¥¤ हमें दोबारा गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤² यानी आवासीय शिकà¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की ओर लौटना होगा। अचà¥à¤›à¥‡ गà¥à¤°à¥à¤“ं को ढूंढकर नठगà¥à¤°à¥ तैयार करने होंगे। वे गà¥à¤°à¥ à¤à¤¸à¥‡ हों, जो सरकार से वेतनवृदà¥à¤§à¤¿ के लिठकारà¥à¤¯ का बहिषà¥à¤•ार न करें, सड़कों पर हड़ताल न करें बलà¥à¤•ि वे बहिषà¥à¤•ार और हड़ताल शिकà¥à¤·à¤¾ में गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ बढ़ाने के लिठकारà¥à¤¯ करें। आज के शिकà¥à¤·à¤•ों को गà¥à¤°à¥ बनने के लिठनैतिक बनना होगा। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस बात पर विचार करना होगा कि जो गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤² नाम की संसà¥à¤¥à¤¾ पहले इतनी समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¨à¥€à¤¯ थी, आज उसका महतà¥à¤µ कम कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हो गया है? इसके लिठसरकार और शिकà¥à¤·à¤• दोनों को काम करने की जरूरत है। à¤à¤¸à¤¾ तà¤à¥€ संà¤à¤µ हो सकता है जब शिकà¥à¤·à¤¾-वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को धारà¥à¤®à¤¿à¤•ता से जोड़ा जाठऔर शिकà¥à¤·à¤•ों को दोबारा से समà¥à¤®à¤¾à¤¨ दिया जाà¤
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Mail to : Ahimsa Foundation
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R29052025
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