यà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ महेंदà¥à¤° ऋषिजी म. सा. - सकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ जीवन परिचय
![]() |
यà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ महेंदà¥à¤° ऋषि जी महाराजसाहब का जनà¥à¤® 5अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1967 को गà¥à¤°à¤¾à¤®- चाकण, तहसील- खेड़, जिला- पà¥à¤£à¥‡, राजà¥à¤¯ - महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में पिताशà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ लाल जी à¤à¤Ÿà¥‡à¤µà¤°à¤¾ के घर आंगन à¤à¤µà¤‚ माता शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ लीलाबाई à¤à¤Ÿà¥‡à¤µà¤°à¤¾ की रतà¥à¤¨ कà¥à¤•à¥à¤·à¤¿ से हà¥à¤†à¥¤ आपका जनà¥à¤® नाम महेंदà¥à¤° रखा गया परंतॠपरिवार जन पà¥à¤¯à¤¾à¤° से आपको मंजू बà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ थे। आप के दो बड़े à¤à¤¾à¤ˆ शà¥à¤°à¥€ राजेंदà¥à¤°à¤œà¥€ शà¥à¤°à¥€ संजयजी à¤à¤µà¤‚ दो छोटे à¤à¤¾à¤ˆ शà¥à¤°à¥€ अà¤à¤¯à¤œà¥€, शà¥à¤°à¥€ अजयजी à¤à¤Ÿà¥‡à¤µà¤°à¤¾ हैं à¤à¤µà¤‚ à¤à¤• बहन सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ जी à¤à¥€ है। इस तरह आपका धरà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ à¤à¤°à¤¾ पूरा परिवार रहा है।
बचपन से ही आपका अपनी माता शà¥à¤°à¥€ के साथ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤• में जाना होता रहा, फल सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª आप साधॠसंतों के संपरà¥à¤• में à¤à¥€ बचपन से ही रहे। जब आप की उमà¥à¤° मातà¥à¤° 7 वरà¥à¤· की रही होगी आपको आचारà¥à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी महाराज साहब का सानिधà¥à¤¯ मिला और तब आपको वैरागà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤µ जागृत हो गà¤à¥¤ आपने गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ की उंगली ही नहीं हाथ थाम लिया। छोटी सी उमà¥à¤° में धरà¥à¤® का जà¥à¤žà¤¾à¤¨, आगम का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ करना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया और 6 वरà¥à¤· तक वैरागà¥à¤¯ काल में रहकर आपने सà¤à¥€ तरह का जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤œà¤¨ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया।
आचारà¥à¤¯ पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी के बगीचे की नई पौध विकसित होने लगी और à¤à¤• समय à¤à¤¸à¤¾ आया कि गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ की पारखी नजरों ने आपको जाना, पहचाना और (महेंदà¥à¤° )मंजू कà¥à¤®à¤¾à¤° से *महेंदà¥à¤° ऋषि बना दिया। वह सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¿à¤® दिवस 3 फरवरी 1982 को पà¥à¤£à¥‡ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ नेहरू सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤® में आपके सांसारिक जीवन से संयमित जीवन की ओर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ का दिन था। गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ आचारà¥à¤¯ पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी ने आपको संसà¥à¤•ृत, पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत, हिंदी, मराठी, अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ अरà¥à¤œà¤¨ करवाया। अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को अपने पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से जनता तक पहà¥à¤‚चाने की वाक कला à¤à¥€ आपने गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ से ही सीखी। आप अपने पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठà¤à¤—वान की वाणी, शासà¥à¤¤à¥à¤° की गाथाओं का उलà¥à¤²à¥‡à¤– करते हà¥à¤ ही करते हैं यह आप की विशेषता है। गायन कला à¤à¥€ आपने गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ से हासिल की, वे मधà¥à¤° कंठके धनी और गायन की समठके महारथी थे*।
आपके कवितà¥à¤µ à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में आचारà¥à¤¯ आनंद ऋषि जी महाराज साहब के अनेक गà¥à¤£à¥‹à¤‚ की à¤à¤²à¤• दिखलाई पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होती है आप मधà¥à¤° वकà¥à¤¤à¤¾ मिलनसार मधà¥à¤° कंठके धनी रहे हैं। जिस दिन से आपने गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ का हाथ थामा उसी दिन से आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपना माता-पिता, सखा, और à¤à¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾ ही मानते रहे और जिस दिन आपके गà¥à¤°à¥ आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी महाराज साहब इस संसार को छोड़कर सà¥à¤µà¤°à¥à¤—सà¥à¤¥ हो गà¤, उसी समय से आपने निरंतर,सतत पिछले 31 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• शनिवार को मौन साधना रखते हैं। और करीब 13 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से सतत, निरंतर à¤à¤•ासन के à¤à¤•ांतर à¤à¥€ कर रहे हैं।
आपके à¤à¤• शिषà¥à¤¯ हैं पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ हितेंदà¥à¤° ऋषि जी महाराज साहब जो कि आपके सांसारिक मितà¥à¤° à¤à¥€ रहे हैं और संयमित जीवन में à¤à¥€ आपके साथ ही आपके शिषà¥à¤¯ बन मितà¥à¤°à¤¤à¤¾ को à¤à¥€ निà¤à¤¾ रहे हैं। आप दोनों की विदà¥à¤µà¤¤à¤¾ और सादगी की अनà¥à¤ªà¤® मितà¥à¤° जोड़ी सरà¥à¤µà¤¤à¥à¤° पहचानी जाती है।
विचारों की दृढ़ता, à¤à¥€à¤¤à¤°- à¤à¤¾à¤µ à¤à¤•रूपता, समतà¥à¤µ- à¤à¤¾à¤µ और सरलता, संयम में सजगता, वाणी में मधà¥à¤°à¤¤à¤¾, मà¥à¤–à¥à¤¯ मंडल की पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾, वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾, जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾, आपकी योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ à¤à¤µà¤‚ अनेक सदà¥à¤—à¥à¤£à¥‹à¤‚ के फल सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª आपको संघ समाज के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कई पदों से विà¤à¥‚षित किया गया। जिन शासक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•, शà¥à¤°à¤®à¤£ संघीय मंतà¥à¤°à¥€, विदरà¥à¤ शिरोमणि, पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ महरà¥à¤·à¤¿, आगम रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र।
पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤• पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ कà¥à¤‚दन ऋषि जी महाराज साहब की शीतल छाया à¤à¤µà¤‚ मंगल कामना व सद पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ तथा पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आदरà¥à¤¶ ऋषि जी महाराज साहब की सद इचà¥à¤›à¤¾ से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ आचारà¥à¤¯ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ योगी डॉ. शिव मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज साहब के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ *इंदौर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ दशहरा मैदान में लगà¤à¤— 100000 से à¤à¥€ अधिक अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ 500 से अधिक साधॠ- साधà¥à¤µà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में यà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पद से नवाजा और चादर उड़ाई गई*। पूरा पंडाल जयकारों और जयघोषों से गूंज उठा। वह à¤à¤• अविसà¥à¤®à¤°à¤£à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¿à¤® दिवस 29 मारà¥à¤š 2015 था। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ शिव मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज साहब के साथ आपने चार चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ साथ करने का सानिधà¥à¤¯ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कियाहै इंदौर, सूरत, उदयपà¥à¤°, और पà¥à¤£à¥‡à¥¤
आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– साहितà¥à¤¯ संपादन निमà¥à¤¨ है: आनंद सà¥à¤µà¤° लहरिया- गीत/ आनंद की सरगम - गीत/ आनंद के सà¥à¤µà¤° - गीत/ सà¥à¤®à¤¿à¤°à¤¨ जिनेशà¥à¤µà¤° का- पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ / गà¥à¤°à¥ आनंद पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦à¥€- दोहे /आनंद सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ महक- थोकड़े इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रहे हैं।
उमà¥à¤° के 56 वरà¥à¤· में आप पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर रहे हैं इस अवसर पर संपूरà¥à¤£ संघ, समाज और परिवार यही à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रखता है कि आप सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ तो रहे ही साथ ही जिनवाणी को अपने मà¥à¤–ारविंद से पलà¥à¤²à¤µà¤¿à¤¤ à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ करें और शà¥à¤°à¤®à¤£ - शà¥à¤°à¤®à¤£à¥€ संघ को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाà¤à¤‚।
![]() |
लेखक:- सà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° मारू, इंदौर (+91 98260 26001)
-----------------------------------------------------
Mail to : Ahimsa Foundation
www.jainsamaj.org
R111022
Related
Related
Related