सà¥à¤–ी और शांतिपूरà¥à¤£ जीवन का रहसà¥à¤¯
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डा0. लोकेश मà¥à¤¨à¤¿
हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤–ी à¤à¤µà¤‚ शांतिपूरà¥à¤£ जीवन की चाह रखता है, लेकिन उसके पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ अपनी इस इचà¥à¤›à¤¾ के अनà¥à¤°à¥‚प नहीं होते। यह à¤à¤• सतà¥à¤¯ है कि शरीर में जितने रोम होते हैं, उनसे à¤à¥€ अधिक होती हैं- इचà¥à¤›à¤¾à¤à¤‚। ये इचà¥à¤›à¤¾à¤à¤‚ सागर की उछलती-मचलती तरंगों के समान होती हैं। मन-सागर में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ उठने वाली लालसाà¤à¤‚ वरà¥à¤·à¤¾ में बांस की तरह बढ़ती ही चली जाती हैं। अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कामनाà¤à¤‚ आदमी को à¤à¤¯à¤‚कर विपदाओं की जाजà¥à¤µà¤²à¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ में फैंक देती है, वह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ बेचैन, तनावगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤, बड़ी बीमारियों का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ केनà¥à¤¦à¥à¤° बनता देखा जा सकता है। वह विपà¥à¤² आकांकà¥à¤·à¤¾à¤“ं की सघन à¤à¤¾à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में इस कदर उलठजाता है कि निकलने का मारà¥à¤— ही नहीं सूà¤à¤¤à¤¾à¥¤ वह परिवार से कट जाता है, सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¿à¤² रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के रस को नीरस कर देता है, समाज-राषà¥à¤Ÿà¥à¤° की हरी-à¤à¤°à¥€ बगिया को लील देता है। न सà¥à¤– से जी सकता है, न मर सकता है।
आज का आदमी à¤à¤¸à¤¾ ही जीवन जी रहा है, वह à¤à¥à¤°à¤® में जी रहा है। जो सà¥à¤– शाशà¥à¤µà¤¤ नहीं है, उसके पीछे मृगमरीचिका की तरह à¤à¤¾à¤— रहा है। धन-दौलत, जर, जमीन, जायदाद कब रहे हैं इस संसार में शाशà¥à¤µà¤¤? पर आदमी मान बैठा कि सब कà¥à¤› मेरे साथ ही जाने वाला है। उसको नहीं मालूम की पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पर विजय पाने वाला सिकनà¥à¤¦à¤° à¤à¥€ मौत के बाद अपने साथ कà¥à¤› नहीं लेकर गया, खाली हाथ ही गया था। फिर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ वह परिगà¥à¤°à¤¹,मूचà¥à¤°à¥à¤›à¤¾, आसकà¥à¤¤à¤¿, तेरे-मेरे के चकà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¥‚ह से निकल नहीं पाता और सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥à¥‹à¤‚ के दल-दल में फंसकर कई जनà¥à¤® खो देता है। चाह सà¥à¤–-शांति की, राह कामना-लालसाओं की, कैसे मिले सà¥à¤–-शांति? कà¥à¤¯à¤¾ धांय-धांय धधकती तृषà¥à¤£à¤¾ की जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ में शांति की शीतल बयार मिल सकती है? धधकते अंगारों की शैयà¥à¤¯à¤¾ पर या खटमल à¤à¤°à¥‡ खाट पर सà¥à¤– की मीठी नींद आ सकती है? कà¥à¤¯à¤¾ कà¤à¥€ इचà¥à¤›à¤¾-सà¥à¤°à¤¸à¤¾ का मà¥à¤– à¤à¤°à¤¾ जा सकता है? सà¥à¤–-शांति का à¤à¤•मातà¥à¤° उपाय है-इचà¥à¤›à¤¾ विराम या इचà¥à¤›à¤¾à¤“ं का नियंतà¥à¤°à¤£à¥¤ जिसने इचà¥à¤›à¤¾à¤“ं पर नियंतà¥à¤°à¤£ करने का थोड़ा à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ किया, वह सà¥à¤– के नंदन वन को पा गया।
आकांकà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚-कामनाà¤à¤‚ वह दीमक है, जो सà¥à¤–ी और शांतिपूरà¥à¤£ जीवन को खोखला कर देती है। कामना-वासना के à¤à¤‚वरजाल में फंसा मन, लहलहाती फसल पर à¤à¥‹à¤²à¥‡ मृग की तरह इनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯ विषयों की फसल पर à¤à¤ªà¤Ÿ पड़ता है। आकरà¥à¤·à¤•-लà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¥‡ विजà¥à¤žà¤¾à¤ªà¤¨à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤²à¥‹à¤à¤¨à¥‹à¤‚ में फंसा तथा लिविंग सà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚डरà¥à¤¡ जीवन सà¥à¤¤à¤° के नाम की आड में आदमी ढ़ेर सारी अनावशà¥à¤¯à¤• वसà¥à¤¤à¥à¤“ं को चाहने लगता है, जिनका न कहीं ओर है न छोर। à¤à¤• समय में कà¥à¤› ही चीजों में इनà¥à¤¸à¤¾à¤¨ संतोष कर लेता था पर आज?...हर वसà¥à¤¤à¥ को पाने की हर इनà¥à¤¸à¤¾à¤¨ में होड-सी लगी हà¥à¤ˆ है। बेतहाशा होड की अंधी दौड़ में आदमी इस कदर à¤à¤¾à¤—ा जा रहा है कि न कहीं पूरà¥à¤£ विराम है, न अरà¥à¤§-विराम। विपà¥à¤² पदारà¥à¤¥, विविध वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤“ं के बावजूद आज का इचà¥à¤›à¤¾-पà¥à¤°à¥à¤· अशांत, कà¥à¤²à¤¾à¤‚त, दिगà¥à¤à¥à¤°à¤¾à¤‚त और तनावपूरà¥à¤£ जीवन जी रहा है। और à¤à¥‹à¤— रहा है-बेचैनी से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤²à¥‡à¤µà¤¾ बीमारियों की पीड़ा। à¤à¤—वान महावीर का जीवन-दरà¥à¤¶à¤¨ हमारे लिये आदरà¥à¤¶ है,कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अनà¥à¤à¤µ से यह जाना कि सोया हà¥à¤† आदमी संसार को सिरà¥à¤« à¤à¥‹à¤—ता है,देखता नहीं जबकि जागा हà¥à¤† आदमी संसार को à¤à¥‹à¤—ता नहीं, सिरà¥à¤« देखता है। à¤à¥‹à¤—ने और देखने की जीवनशैली ही महावीर की समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ जिनà¥à¤¦à¤—ी का वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ सूतà¥à¤° है। और यही वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ सूतà¥à¤° जन-जन की जीवनशैली बने, तà¤à¥€ आदमी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ पाकर सà¥à¤–ी और शांतिपूरà¥à¤£ जीवन का हारà¥à¤¦ पा सकता है।
समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जीवन का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग है जिसका अंत कà¤à¥€ नहीं हो सकता। à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ जाती है तो दूसरी आ जाती है। यह जीवन की पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक चकà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ यà¥à¤— में कोई à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤¸à¤¾ नहीं है जिसे किसी पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾ न हो। आप घर के सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ हैं, समाज à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤¥à¤¾ के संचालक हैं या किसी à¤à¥€ जनसमूह के पà¥à¤°à¤¬à¤‚धक हैं à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• हैं तो आपके सामने कठिनाइयों का आना अनिवारà¥à¤¯ है। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चाहे अकेला हो या पारिवारिक, समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ सà¤à¥€ के साथ आती है तो सारी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का समाधान है अटल धैरà¥à¤¯à¥¤ धैरà¥à¤¯ के बल पर ही हमें समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल सकती है। हमें इस तथà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ को मानना होगा कि जीवन में सदैव उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जीवन में à¤à¤¸à¥€ घटनाà¤à¤‚ घट जाती हैं जिनकी हम कà¤à¥€ कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥€ नहीं कर सकते लेकिन हमें किसी à¤à¥€ अनà¥à¤•ूल पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अपना धैरà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ संतà¥à¤²à¤¨ नहीं खोना चाहिà¤à¥¤ यह à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• है कि जीवन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हमारा नजरिया à¤à¥‹à¤—वादी न होकर संयममय हो।
जीवन तंतà¥à¤°, समाज तंतà¥à¤° व राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¤à¤‚तà¥à¤° चलाने में अरà¥à¤¥ व पदारà¥à¤¥ अवशà¥à¤¯ सारà¥à¤¥à¤• à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं पर जब अरà¥à¤¥ व पदारà¥à¤¥ मन-मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पर हावी हो जाते हैं, तब सारे तंतà¥à¤° फेल हो जाते हैं। अरà¥à¤¥ व पदारà¥à¤¥ जीवन निरà¥à¤µà¤¾à¤¹ के साधन मातà¥à¤° हैं, साधà¥à¤¯ नहीं। गलती तब होती है जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साधà¥à¤¯ मान लिया जाता है। साधà¥à¤¯ मान लेने पर शà¥à¤°à¥‚ होती है-अरà¥à¤¥ की अंधी दौड़ और अनाप-शनाप पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को येनकेन पà¥à¤°à¤•ारेण पाने की जोड़-तोड़, अंधी दौड़ और जोड़तोड़ में आंखों पर जादà¥à¤ˆ पटà¥à¤Ÿà¥€ बंध जाती है, तब उसे नà¥à¤¯à¤¾à¤¯-इनà¥à¤¸à¤¾à¤«, धरà¥à¤®-ईमान, रिशà¥à¤¤à¥‡-नाते, परिवार, समाज व राषà¥à¤Ÿà¥à¤° कà¥à¤› नहीं दीखता, दीखता है - केवल अरà¥à¤¥, अरà¥à¤¥ और अरà¥à¤¥....।
मानव हम दो में सिमटता, सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ जा रहा है फलतः मानवीय संबंध बà¥à¤°à¥€ तरह से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो बिखर रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं, सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¿à¤² संबंधों में दरारें पड़ रही है, हम पिया - हमारा बैल पीया का मनोà¤à¤¾à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृतिके मूलà¤à¥‚त सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त-सदाचार, सदà¥à¤à¤¾à¤µ, शांति-समता, समरसता को खतà¥à¤® करने पर तà¥à¤²à¥‡ हà¥à¤ हैं। मनà¥à¤·à¥à¤¯ सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µà¤¤à¤ƒ कामना बहà¥à¤² होता है। à¤à¤• लालसा-कामना अनेक लालसाओं की जननी बनती है। जबकि छह फà¥à¤Ÿ जमीन, शायद यही होती है-वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• आवशà¥à¤¯à¤•ता। यह है कामनाओं की अंधी दौड़ की अंतिम परिणति। आकांकà¥à¤·à¤¾à¤“ं से मूचà¥à¤°à¥à¤›à¤¿à¤¤ चेतन को जीवित करने के लिठसही समठका संजीवन चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤•रात का सà¥à¤µà¤šà¤¨ है-‘‘जà¥à¤¯à¥‹à¤‚-जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इचà¥à¤›à¤¾à¤“ं को कम करता है, देवताओं के समककà¥à¤· हो जाता है। सà¥à¤–, शांति और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का उपहार पा लेता है।
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पà¥à¤°à¥‡à¤·à¤• : आचारà¥à¤¯ लोकेश आशà¥à¤°à¤®, 63/1, ओलà¥à¤¡ राजेनà¥à¤¦à¥à¤° नगर, करोल बाग मेटà¥à¤°à¥‹ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ के समीप, नई दिलà¥à¤²à¥€-110060
दूरà¤à¤¾à¤· : 011-2573 2317, 09313833222, ईमेल : avbl863@gmail.com
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